बिहार समाचार: बिहार में स्कूलों के लिए जो नया नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क में बदलाव किया गया है उसमें एनसीएफ में स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों के लिए मानकों के आधार पर पढ़ाई के घंटे निर्धारित किये गये हैं. इसके तहत स्कूलों में हफ्ते में अब सिर्फ 29 घंटे ही पढ़ाई होगी. सोमवार से शुक्रवार तक पांच से साढ़े पांच घंटे की पढ़ाई होगी. वही महीने के दो शनिवार को कुछ घंटे की ही पढ़ाई होगी. दो शनिवार को छुट्टी रहेगी. स्कूलों में पढ़ाई के लिए प्रस्तावित इस नये शेड्यूल में बच्चों को प्रत्येक स्तर पर पढ़ाई के दबाव से राहत देने की कोशिश की गई है.

परीक्षा के साथ-साथ पढ़ाई के दबाव से भी उबरेंगे छात्र

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तैयार किये गये नये एनसीएफ में प्रमुख विषयों की कक्षाओं को छोड़ दें तो प्रत्येक स्टेज पर कक्षाओं का समय अधिकतम 35 मिनट तक ही रखा गया है. प्रमुख विषयों से जुड़ी कक्षाओं के लिए प्रत्येक स्टेज के अनुसार 40 से 50 मिनट तक का समय निर्धारित किया गया है. इस दौरान पूरी पढ़ाई को रूचिकर और दबाव मुक्त बनाने के लिए स्कूलों में हर दिन खेल, प्रतिस्पर्धा और आर्ट जैसी गतिविधियां आयोजित होगी. यह गतिविधियां पढ़ाई के घंटों में ही आयोजित होगी. इन गतिविधियों के लिए औसतन हर दिन होने वाली पढ़ाई के घंटे में से आधा समय दिया जायेगा. इसके साथ ही स्कूल समय में ही बच्चों को ब्रेकफास्ट और लंच के लिए भी करीब घंटे भर का समय निर्धारित किया गया है.

10 दिन बिना बस्ता के आयेंगे स्कूल

एनसीएफ के तहत स्कूलों में पढ़ाई के घंटे निर्धारित किया गया, इससे छात्रों को मौजूदा समय मे चल रहे पढ़ाई के व्यस्त शिड्यूल से राहत मिलेगी. वर्तमान में छात्रों को स्कूलों में दाखिल होने के बाद पूरे समय पढ़ाई में ही डूबे रहना होता है. लेकिन अब वह इस नई व्यवस्था के बाद दबाव मुक्त होकर पढ़ सकेंगे. इस व्यवस्था में प्रत्येक कक्षा के बाद पांच मिनट का ब्रेक भी रखा गया है. एनसीएफ ने स्कूली बच्चों को पढ़ाई से बोझ से राहत अन्य राहत भी दिया है. अब छात्र को साल के 10 दिन तक बिना बस्ता के स्कूल आना होगा. इन दौरान छात्रों को किताबों की जगह मौखिक और प्रयोगों के जरिए पढ़ाया जायेगा.

साल में 180 दिन चलेगी कक्षाएं

एनसीएफ के तहत साल में 180 दिन ही कक्षाएं लगेगी. एनसीएफ के तहत साल में वैसे भी राष्ट्रीय अवकाश सहित ग्रीष्म व शीतकालीन छुट्टियां आदि के चलते स्कूल 220 दिन ही खुलते है. इनमें से 20 दिन परीक्षाओं और 20 दिन स्कूलों में संचालित होने वाली अलग-अलग गतिविधियों में चले जाते है. ऐसे में पढ़ाई सिर्फ 180 दिन ही होती है. इसके आधार पर पढ़ाई की पूरा शेड्यूल निर्धारित किया है. मालूम हो कि एनसीएफ में छात्रों को परीक्षा के दबाव से राहत देने की भी पहल की गई है. इसके तहत बोर्ड परीक्षाओं को साल में दो बार आयोजित करने का प्रस्ताव किया गया है.

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