पंजाब और गुजरात उपचुनावों में मिली जीत अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए नई उम्मीद की किरण बन कर आई है. शायद यही कारण है कि अब उन्हें 2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार से उबरने की ताकत भी मिल गई है. यही कारण है कि केजरीवाल ने अपनी रणनीति को  दिल्ली में नए सिरे से केंद्रित कर रहे हैं. जिस तरह आम आदमी पार्टी दिल्ली में झुग्गीवासियों के मुद्दों पर आक्रामक हुई है उससे तो कम से कम यही लगता है.

झुग्गीवासियों को जहां अरविंद केजरीवाल आश्वस्त करते हैं कि जब तक वो जीवित हैं उनके घरों को कई तोड़ नहीं पाएगा. वहीं गोपाल राय ने 29 जून 2025 को जंतर-मंतर पर आयोजित घर और रोज़गार बचाओ आंदोलन के दौरान दिया गया बयान तो और भी आक्रामक है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि झुग्गियां तोड़ी गईं, तो लोग प्रधानमंत्री आवास में घुसकर कब्जा करेंगे. हालांकि आम आदमी पार्टी के नेताओं की झुग्गीवासियों के लिए अतिसक्रियता को एक जोखिम भरी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.

AAP की झुग्गीवासियों के लिए अतिसक्रियता

AAP ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में हार के बाद झुग्गीवासियों को फिर से एकजुट करने में लगी है. माना जाता है कि दिल्ली में लगभग 40 लाख झुग्गीवासी हैं जो कुल जनसंख्या का 15-16% के करीब हैं.  पार्टी ने पहले 2013, 2015, और 2020 के चुनावों में इस समुदाय का पूर्ण समर्थन हासिल था. 2025 की हार आम आदमी पार्टी को 22 सीटें ही मिलीं जो 2020 की 62 सीटों से बहुत कम थीं. पार्टी को लगता है कि उनकी हार का कारण झुग्गीवासियों के कोर वोट में बीजेपी ने सेंध लगा दी थी. शायद यही कारण है कि पार्टी झुग्गीवासियों के मुद्दों पर और अधिक आक्रामक रुख अपनाने के लिए तैयार हुई है.

29 जून को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में गोपाल राय और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में AAP ने बीजेपी की कथित झुग्गी तोड़ो नीति के खिलाफ आक्रामक प्रदर्शन किया. केजरीवाल ने कहा, जब तक मैं ज़िंदा हूँ, किसी की झुग्गी नहीं टूटेगी. गोपाल राय ने तो हद ही कर दी . उन्होंने पीएम आवास पर कब्जे की धमकी दे दी.

पार्टी ने दिल्ली के विभिन्न झुग्गी-बस्तियों में झुग्गी संवाद कार्यक्रम शुरू किए हैं. जैसे तिगड़ी-1 जेजे क्लस्टर और मोतीनगर में पार्टी नेता और कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर स्थानीय लोगों से मुलाकात की. यहां आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी की नीतियों की जमकर आलोचना की. AAP नेताओं ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने 1 लाख से अधिक लोगों को बेघर कर दिया.  इसके साथ ही जहां झुग्गी, वहां मकान के वादे से मुकरने का आरोप भी लगाया.
इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि झुग्गीवासी AAP के पारंपरिक समर्थक रहे हैं. जाहिर है कि दिल्ली में बीजेपी सरकार के खिलाफ AAP के लिए यह मुद्दा राम बाण का काम करने वाला है.कम से कम विपक्ष के रूप में अभी अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए बढ़िया है ही.

क्या यह अतिसक्रियता AAP पर भारी पड़ सकती है?

AAP की झुग्गीवासियों के लिए अतिसक्रियता बहुत भारी पड़ सकती है. गोपाल राय का प्रधानमंत्री आवास पर कब्जा और प्रधानमंत्री को बाहर करने वाला बयान कानूनी रूप से जोखिम भरा है.
IPC धारा 124A (देशद्रोह) के तहत यह बयान सरकार के खिलाफ अराजकता भड़काने वाला माना जा सकता है. सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इसे बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे मामलों से जोड़ा, जहां सरकारी संपत्तियों पर कब्जा हुआ. यदि दिल्ली पुलिस या गृह मंत्रालय शिकायत दर्ज करता है, तो गोपाल राय पर FIR दर्ज हो सकती है, जैसा कि 2024 में अमानतुल्लाह खान के खिलाफ धमकी के लिए हुई थी. यह AAP की छवि को और नुकसान पहुंचा सकता है.

बीजेपी ने राय के बयान को नक्सली मानसिकता और देशद्रोही करार दिया है. बीजेपी  सरकार ने पहले ही जहां झुग्गी, वहां मकान योजना के तहत झुग्गीवासियों के लिए घरों का उद्घाटन किया है.

कांग्रेस ने भी AAP के आंदोलन को घड़ियाली आँसू करार दिया है. पार्टी ने दावा करते हुए कि AAP ने अपनी सरकार के दौरान झुग्गीवासियों के लिए कुछ नहीं किया. झुग्गियों को बनाए रखना  AAP को एक अराजक पार्टी के रूप में चित्रित कर सकता है, जो मध्यम वर्ग और शहरी मतदाताओं को पार्टी से दूर कर कर सकता है.



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