भारत के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा की टीम में बतौर मुख्य स्पिनर चयन पर सवाल खड़े किए हैं. चैपल का मानना है कि जडेजा की गेंदबाज़ी इंग्लैंड की परिस्थितियों में प्रभावी नहीं है और अगर भारत को पांच मैचों की सीरीज में वापसी करनी है, तो उन्हें बेहतर संतुलित टीम उतारनी होगी. चैपल ने यह बात ESPNCricinfo में लिखे अपने कॉलम में कही है. उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों पर भरोसा करना चाहिए न कि सिर्फ ऑलराउंडरों के सहारे टीम को चलाना चाहिए.

पहले टेस्ट में गेंद से कोई असर नहीं छोड़ सके जडेजा

पहले टेस्ट में रवींद्र जडेजा को हेडिंग्ले, लीड्स में टीम में बतौर इकलौते स्पिनर खिलाया गया था. हालांकि, जडेजा गेंद से कोई प्रभाव नहीं डाल सके, खासकर इंग्लैंड की दूसरी पारी में जब बेन डकेट के ऑफ स्टंप के बाहर बने रफ का वो फायदा नहीं उठा सके.इसी कारण कई क्रिकेट एक्सपर्ट्स ने जडेजा की गेंदबाज़ी पर सवाल उठाए.

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ग्रेग चैपल ने लिखा, ‘जडेजा इंग्लैंड की परिस्थितियों में फ्रंटलाइन स्पिनर नहीं हैं. अगर उनकी बल्लेबाज़ी को उपयोगी माना जाता है तो उन्हें सपोर्ट स्पिनर की भूमिका मिल सकती है. वरना, टीम चयन पर फिर से सोचने की ज़रूरत है.’ उन्होंने आगे कहा कि यदि भारत को सीरीज़ में वापसी करनी है, तो सही संतुलन वाली टीम उतारनी ही होगी.

चैपल ने यह भी लिखा कि टॉप ऑर्डर की नाकामी को छुपाने के लिए टीम में ऑलराउंडर या पार्ट-टाइम बॉलर्स को शामिल करना सही रणनीति नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर टॉप छह बल्लेबाज़ रन नहीं बना रहे, तो उस पर काम करें, लेकिन गेंदबाज़ी के लिए 20 विकेट लेने में सक्षम कॉम्बिनेशन ही टीम में होना चाहिए.

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“सेलेक्टर्स को लेने होंगे साहसिक फैसले”

पूर्व कोच का मानना है कि अब दबाव चयनकर्ताओं पर है, जिन्हें साहसिक फैसले लेने होंगे. अगर बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ जोखिम लेकर खेलने को तैयार हैं, तो चयनकर्ताओं को भी साहसी फैसले लेने की हिम्मत दिखानी होगी. इधर भारत के असिस्टेंट कोच रायन टेन डोशाटे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में संकेत दिए कि नीतीश कुमार रेड्डी को बर्मिंघम टेस्ट में डेब्यू का मौका मिल सकता है. भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा टेस्ट 2 जुलाई, बुधवार से एजबेस्टन, बर्मिंघम में खेला जाएगा. पहला मैच भारत पांच विकेट से हार गया था और अब कप्तान शुभमन गिल के सामने बड़ी चुनौती होगी.



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