Weak grip strength: हाथ की कमजोर पकड़ से हार्ट अटैक-स्ट्रोक का खतरा! ऐसे मजबूत करें ग्रिप स्ट्रेंथ – weak grip increases the risk of heart attack and stroke and is linked to everything from diabetes obesity to muscle loss tvism


आजकल के समय में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और डायबिटीज जैसी समस्याएं काफी अधिक हो रही हैं. इन बीमारियों के अलग-अलग कारण सामने आते हैं जिसके लिए डॉक्टर्स समय-समय पर सावधानी बरतने की भी सलाह देते हैं. लेकिन हाल ही में हुई एक स्टडी में सामने आया है कि इंसान के हाथ की पकड़ (ग्रिप) जितनी मजबूत होगी उसे इन बीमारियों का जोखिम उतना ही कम होगा. सीधे शब्दों में कहें तो, आपकी पकड़ जितनी कमजोर होगी, आपकी जल्दी मृत्यु की संभावना उतनी ही अधिक होगी.

क्या बताया स्टडी में

17 देशों में 1.40 लाख वयस्कों पर की गई स्टडी में पाया गया है कि कमजोर पकड़ से दिल के दौरे और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है. यह ऑस्टियोपोरोसिस, डायबिटीज, रुमेटीइड गठिया, गिरने के जोखिम और मोटापे के साथ-साथ कॉग्नेटिव हेल्थ से भी जुड़ा हुआ है. इन सभी कारणों से डॉक्टर अक्सर मरीज के स्वास्थ्य के बारे में जानने के लिए ग्रिप स्ट्रेंथ का उपयोग करते हैं जिसमें सर्जरी से ठीक होने या इंडिपेंडेंट रूप से सर्वाइव करने की क्षमता भी शामिल होती है.

फिजियोथेरेपिस्ट सारा मिलनर का कहना है, ‘ग्रिप स्ट्रेंथ का पता करने के लिए आपको किसी मशीन की जरूरत नहीं है, किसी मसल्स को चैक करने की जरूरत है और ना ही वजन लेने की जरूरत है. बस आपको हाथ की पकड़ देखनी होगी कि आप कितनी मजबूती से और कितनी देर तक किसी चीज को पकड़ सकते हैं.

दिल्ली के जीपी रमित सिंह संब्याल का कहना है, ‘मजबूत ग्रिप शरीर की स्ट्रेंथ, न्यूरोमस्कुलर कॉडिनेशन और हार्ट संबंधी फ्लेग्जिबिलिटी को दिखाती है. 50 की उम्र के मरीज जिनकी पकड़ कमजोर होती है वे अक्सर थकान, छोटी-मोटी बीमारियों के बाद धीमी रिकवरी और शरीर में फैट के अधिक जमा होने की शिकायत करते हैं. वहीं इसके विपरीत जिनकी पकड़ मजबूत होती है, उनकी फिटनेस बेहतर होती है और वे जल्दी ठीक हो जाते हैं.’

स्पष्ट रूप से कहें तो यह नहीं कहा जा सकता कि कमजोर पकड़ आपको सीधे तौर पर मार ही देगी, जिस तरह से हार्ट फेलियर से मौत होती है. लेकिन यह आमतौर पर आपके हाथों और कलाई से कहीं ज़्यादा समस्याओं का संकेत देता है. उम्र बढ़ने के साथ-साथ पकड़ का कमज़ोर होना नॉर्मल है.

ओक ट्री मोबिलिटी में ओटी सर्विस की डायरेक्ट सामंथा शैन का कहना है, ‘लगभग 50 की उम्र से मांसपेशियों का द्रव्यमान और तंत्रिका काम धीरे होनी की प्रोसेस शुरू हो जाती है. लेकिन एक्टिव रहना, विशेष रूप से हाथों से किए जाने वाले कामों के साथ, इस प्रोसेस को धीमा करने में मदद कर सकता है.’

ग्रिप स्ट्रेंथ के लिए डिवाइस

फिजियोथेरेपिस्ट सारा मिलनर का कहना है, ‘ग्रिप टेस्ट के लिए आप टेनिस बॉल को दबाकर यह देख सकते हैं कि आप कितनी देर तक अपनी सबसे मजबूत पकड़ बनाए रख सकते हैं. ऐसा नियमित रूप से करें और आप ट्रैक कर पाएंगे कि आपकी पकड़ बेहतर हो रही है या खराब हो रही है.’

अधिक औपचारिक माप के लिए आप आमतौर पर डायनेमोमीटर नामक डिवाइस का उपयोग कर सकते हैं. पकड़ की ताकत उम्र और लिंग के साथ बदलती रहती है. डायनेमोमीटर पर मोटे तौर पर नीचे के आंकड़ों से पता लगा सकते हैं कि उम्र के मुताबिक कितनी स्ट्रेंथ होनी चाहिए.

आयु 18 से 25 वर्ष महिलाएं: 27-31 किग्रा, पुरुष 46-52 किग्रा
आयु 26 से 35 वर्ष महिलाएं: 26-30 किग्रा, पुरुष 44-50 किग्रा आयु
36 से 45 वर्ष महिलाएं: 25-29 किग्रा, पुरुष 42-48 किग्रा आयु 46 से 60 वर्ष महिलाएं 20-28 किग्रा, पुरुष 35-47 किग्रा आयु.
61 से 75 वर्ष महिलाएं: 18-26 किग्रा, पुरुष 30-45 किग्रा 75 से अधिक महिलाएं 16-20 किग्रा, पुरुष 25-40 किग्रा.

स्ट्रेंथ बढ़ाने के लिए क्या करें?

स्ट्रेंथ बढ़ाने के लिए आप कुछ बेसिक नियम फॉलो कर सकते हैं. जैसे, गीले तौलिये को निचोड़ें, पिंच ग्रिप होल्ड करें, पुश अप करें, पुल अप करें, वजन को उठाकर अपने हाथ में पकड़े रहें. बस इन्हीं बेसिक चीजों से भी आप अपनी ग्रिप स्ट्रेंथ बढ़ा सकते हैं.



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