Jharkhand High Court: रांची, राणा प्रताप-झारखंड हाईकोर्ट ने प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सभी अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत छूट देने के मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान प्रार्थी का पक्ष सुना. पक्ष सुनने के बाद खंडपीठ ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के सचिव को नोटिस जारी किया. खंडपीठ ने चार सप्ताह के अंदर जवाब दायर करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 12 अगस्त की तिथि निर्धारित की.

अभ्यर्थी कंचन डे ने दायर की थी रिट याचिका

इससे पूर्व प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पैरवी की. उन्होंने खंडपीठ को बताया कि एनसीटीई के 2011 की अधिसूचना के मुताबिक न्यूनतम शैक्षणिक अर्हता में आरक्षित वर्ग को पांच प्रतिशत की छूट दी जाती है. सहायक आचार्य नियुक्ति नियमावली एवं प्रकाशित विज्ञापन में इसका जिक्र नहीं था. इसको लेकर अभ्यर्थी कंचन डे ने रिट याचिका दायर की थी. याचिका के लंबित रहने के दौरान राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर पांच प्रतिशत की छूट दे दी थी.

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अभ्यर्थियों को नहीं दी गयी थी पांच प्रतिशत की छूट

एक मार्च 2024 को खंडपीठ ने आदेश पारित कर कहा कि यह अधिसूचना रिजर्व कैटेगरी के उन सभी अभ्यर्थियों पर लागू होगी, जो प्रतियोगिता में शामिल है. जेएसएससी ने डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन के लिए अभ्यर्थियों को बुलाया. उसमें जब अभ्यर्थी शामिल हुए, तो पांच प्रतिशत की छूट नहीं दी गयी और न्यूनतम शेक्षणिक अर्हता 50 प्रतिशत रखी गयी. अभ्यर्थियों को शोकॉज जारी कर दिया गया.

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