हाईकोर्ट ने केजरीवाल की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय से मांगा जवाब


Liquor Scam: दिल्ली में कथित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय के समन को निचली अदालत द्वारा वैध ठहराने के फैसले को चुनौती देने वाली अरविंद केजरीवाल की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी कर जवाब देने का आदेश दिया. जांच एजेंसी को 6 हफ्ते में जवाब दाखिल करना होगा. न्यायाधीश रविंदर डुडेजा के समक्ष प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश वकील ने कहा कि केजरीवाल की याचिका स्वीकार करने योग्य नहीं है.

केजरीवाल ने सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दूसरी समीक्षा याचिका दाखिल की है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है. इस पर अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय को जवाबी हलफनामे में अपनी आपत्ति दर्ज करने को कहा. यही नहीं पीठ ने केजरीवाल की दूसरी याचिका पर भी नोटिस जारी कर जवाब देने का आदेश दिया. केजरीवाल ने दूसरी याचिका में मामले की सुनवाई दूसरी अदालत में हस्तांतरित करने की मांग की है. सेशन कोर्ट ने केजरीवाल की मामले को दूसरे अदालत में हस्तांतरित करने की मांग को अस्वीकार कर दिया था. अब मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी.

गौरतलब है कि दिल्ली में आबकारी नीति में हुए भ्रष्टाचार के मामले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय दोनों कर रहा है. इस मामले में आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं को जेल भी जाना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को जमानत दी.

क्या है मामला

दिल्ली की आबकारी नीति में हुए कथित भ्रष्टाचार से जुड़े धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पूछताछ के लिए अरविंद केजरीवाल को कई बार समन भेजा. लेकिन केजरीवाल जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने राउज एवेन्यू कोर्ट में केजरीवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी. जांच एजेंसी की शिकायत पर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को 2 समन जारी किया. केजरीवाल ने इस समन आदेश और सेशंस कोर्ट के 17 सितंबर 2024 के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया. इस फैसले के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया.

कई महीने जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया. जांच एजेंसी का आरोप है कि दिल्ली में बनायी गयी आबकारी नीति कुछ शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनायी गयी. इसके एवज में शराब कंपनियों ने आम आदमी पार्टी को पैसा दिया.इस पैसे का इस्तेमाल पार्टी ने गोवा विधानसभा चुनाव लड़ने में किया. इस मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय दोनों अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर चुके हैं और मामला अदालत के विचाराधीन है.



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