जब नेताओं को अपने मुद्दे, अपने वोट की चिंता होती है तब वो ट्रेन रोको, बस रोको, सड़क बंद करो, रास्ता रोको जैसे नारों के साथ उतरते हैं, लेकिन क्या आपने किसी नेता, किसी पार्टी को खराब, जर्जर, मौत के हादसों वाले पुल से बचाने के लिए धरना देते देखा? क्या आपने किसी नेता, पार्टी को कभी खराब शिक्षा व्यवस्था पर आंदोलन करते देखा? क्या कभी किसी नेता को मिलावट वाले जहर के खिलाफ भूख हड़ताल करते देखा? आप कहेंगे नहीं. इसीलिए सवाल करिए, क्योंकि सवाल नहीं करेंगे तो नेता जनता की जान को हमेशा सस्ती समझते रहेंगे जैसे आज गुजरात के वडोदरा में हुआ. जहां एक पुल गिर गया. 13 लोगों की जान चली गई. सबसे पहले आप सवाल करिए और कहिए कि सरकारें तय करें कि आखिर कितनी मौत के बाद जागेगी?

बता दें कि गुजरात में तीन साल पहले भी पुल गिरने के बाद दावा हुआ था कि बस अब ऐसा हादसा नहीं होने देंगे. याद करिए 2022 में मोरबी में पुल गिरा था, 135 लोगों की मौत हुई थी. आम आदमी की जान गई तो गुजरात सरकार ने कहा था कि अब हर पुल की मजबूती जांचेंगे. पता नहीं कितनी जांची. हां, ये जरूर पता है कि गुजरात के ही वडोदरा में बुधवार को 40 साल पुराना पुल बीच से गिर गया. अब तक 13 आम लोगों के शव मिल चुके हैं. बस यही नहीं पता चल रहा है कि अगर पुलों की मजबूती जांच ली थी…तो फिर ये पुल कैसे गिर गया?

जो अपने घर से दफ्तर, फैक्ट्री के लिए निकले थे, अब कभी घर नहीं लौटेंगे. क्योंकि बुधवार सुबह जब वो अपने घर से गुजरात में आणंद को वडोदरा को जोड़ने वाले गंभीरा पुल से गुजरे, तभी 900 मीटर लंबे पुल का एक हिस्सा बीच से धराशायी हो गया. दो ट्रक, एक इको वैन, एक पिकअप गाड़ी और एक ऑटोरिक्शा नीचे गिर गए.

गंभीरा ब्रिज का एक हिस्सा टूटा

क्या वडोदरा के पुल की मजबूती नहीं जांची गई?

13 मौत के बाद फिर से मुआवजा, जांच, निरीक्षण, कार्रवाई, बख्शेंगे नहीं… जैसी रटी रटाई सरकारी भाषा का ढिढोरा पीटा जाने लगा है. जबकि सवाल है कि मोरबी में पुल गिरने पर 135 मौत के बाद तय हुआ था कि सभी ब्रिज की मजबूती जांची जाएगी तो क्या वडोदरा के 40 साल पुराने पुल की मजबूती नहीं जांची गई थी?

गुजरात के वडोदरा में ब्रिज टूटा

15 दिन पहले नहीं जागा प्रशासन!

15 दिन पहले स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर विजय चरण ने एकलबारा और मुजपुर के सरपंच और अन्य स्थानीय लोगों के साथ पुल का दौरा किया था और स्थिति का निरीक्षण किया था. क्योंकि इस पुल के बुरी हालत में होने का दावा तो स्थानीय लोग बहुत पहले से कर रहे थे. लेकिन कोई इस पुल की हालत पर नहीं जागा औऱ फिर जिस पुल से सबसे ज्यादा नौकरीपेशा आम लोग गुजरते थे, उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया गया. सवाल ये है कि जो 135 मौत के बाद नहीं जागे, क्या अब 13 मौत के बाद जागेंगे?

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