भारत की स्पेस एजेंसी इसरो (ISRO) के वैज्ञानिकों की सजगता के कारण ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अन्य 10 अंतरिक्ष यात्रियों के साथ जिस फाल्कन 9 रॉकेट (Falcon 9 Rocket) से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर जाने वाले थे, उसमें 10 जून को बड़ी खामी पकड़ में आई थी. इसरो ने ही फाल्कन 9 रॉकेट की सेफ्टी को लेकर चेतावनी जारी की थी, जिसके कारण अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के ऐतिहासिक मिशन की लॉन्चिंग को रोका गया था. यह लॉन्चिंग 11 जून को होनी थी, लेकिन 10 जून की शाम को इसे रद्द कर दिया गया था, जब इसरो की टीम ने फाल्कन 9 रॉकेट के बूस्टर में लीक और क्रैक का पता लगाया.

यह जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख वी नारायणन ने दी. हाल ही में प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय में बोलते हुए इसरो प्रमुख ने फॉल्कन 9 की लॉन्चिंग रद्द होने के तनावपूर्ण क्षणों का जिक्र किया. उन्होंने कहा, ‘मैं टीम का नेतृत्व कर रहा था और गहन विचार-विमर्श के बाद, हमने रॉकेट को टेक ऑफ नहीं कराने का फैसला किया. 10 जून की शाम को, हमने SpaceX की टीम को लॉन्चिंग रद्द करने की सूचना दे दी. मेरी टीम रॉकेट की सेफ्टी को लेकर आश्वस्त नहीं थी और उन्होंने इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया.’ यह निर्णय अगले दिन सही साबित हुआ जब SpaceX के इंजीनियरों ने फाल्कन 9 रॉकेट के बूस्टर में क्रैक और लीक की पुष्टि की.

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शुरुआत में, कुछ लोगों ने इसरो की चिंताओं को जरूरत से ज्यादा सतर्कता बताकर खारिज कर दिया, लेकिन इसरो चीफ वी नारायणन ने जोर देकर कहा कि यह मिशन और अंतरिक्ष यात्रियों का जीवन बचाने वाला एक शानदार फैसला था. इसरो की सतर्कता की बदौलत, शुभांशु शुक्ला का मिशन सुरक्षित रहा और वह 26 जून को सफलतापूर्वक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंच गए, जिससे ग्लोबल स्पेस एक्सप्लोरेशन में भारत के बढ़ते कद का पता चलता है. यह मिशन, जिसे एक्सिओम-4 (एक्स-4) के नाम से जाना जाता है, नासा, स्पेसएक्स, एक्सिओम स्पेस और इसरो का जॉइंट मिशन है.

शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) का दौरा करने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री हैं और 1984 में राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं. तकनीकी समस्याओं के कारण मिशन को कई बार टालना पड़ा, जिसमें फाल्कन 9 रॉकेट के बूस्टर में लीक और क्रैक और ISS पर समस्याएं शामिल थीं. इसरो प्रमुख वी नारायणन ने संभावित आपदा को टालने वाली टीम वर्क की प्रशंसा करते हुए प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय में अपने संबोधन में कहा, ‘आज, अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और पूरा मिशन सुरक्षित है. भारत किसी से पीछे नहीं है.’

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शुभांशु शुक्ला इस मिशन में स्पेस न्यूट्रिशन और बायोलॉली से संबंधित साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट करना, भारत के गगनयान प्रोग्राम के लिए बहुमूल्य डेटा जुटाना शामिल है. फाल्कन रॉकेट की सफल लॉन्चिंग और एक्सिओम-4 मिशन, ह्यूमन स्पेस एक्सप्लोरेशन में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. अब सभी की निगाहें 14 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से क्रू की धरती पर सुरक्षित वापसी पर टिकी हैं.

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