Balasore Sexual Harassment Case – बालासोर यौन उत्पीड़न केस: पीड़िता ने की आत्मदाह की कोशिश, पिता का आरोप- केस वापस लेने का बनाया गया दबाव – Balasore sexual harassment case victim pressured to withdraw complaint Odisha opnm2


ओडिशा के बालासोर में आत्मदाह का प्रयास करने वाली कॉलेज छात्रा के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. पीड़िता के पिता ने दावा किया है कि उनकी बेटी पर यौन उत्पीड़न की शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था. पीड़िता फिलहाल गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है. इस पूरे प्रकरण में कॉलेज प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.

आरोप है कि राजकीय फकीर मोहन (स्वायत्त) कॉलेज के प्राचार्य दिलीप घोष ने आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की रिपोर्ट के आधार पर छात्रा को बताया कि उनके आरोपों में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं. प्राचार्य ने यह भी कहा कि शिक्षक पर झूठा आरोप लगाने के लिए कॉलेज प्रशासन खुद छात्रा के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है.

यह बात सुनने के कुछ ही मिनटों बाद छात्रा ने कॉलेज परिसर में खुद को आग लगा ली. पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि यह आत्मदाह का कदम कॉलेज प्रशासन के दबाव और असंवेदनशील रवैये के कारण उठाया गया. उन्होंने कहा, ”मेरी बेटी आरोप को निराधार बताया गया. उसे मानसिक तौर पर तोड़ दिया गया. इसलिए उसे ये कदम उठाया.”

पीड़िता ने 30 जून को कॉलेज के एक शिक्षक समीरा कुमार साहू के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी. 2 जुलाई से वह कॉलेज परिसर में प्रदर्शन कर रही थी. इस बीच उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक अपील भी पोस्ट की, जिसमें मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, सांसद, विधायक सहित तमाम जिम्मेदारों को टैग किया.

पीड़ित छात्रा के पिता ने कहा कि जब उन्होंने इस मुद्दे पर प्राचार्य से मुलाकात की, तो उन्हें यह कहकर आश्वस्त किया गया था कि चिंता न करें, सब कुछ ठीक कर दिया जाएगा. लेकिन स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती गई. पीड़िता के अनुसार, आरोपी शिक्षक ने उसे धमकी दी थी कि यदि वो सहयोग नहीं करेगी, तो उसका शैक्षणिक रिकॉर्ड खराब कर दिया जाएगा.

फकीर मोहन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संतोष त्रिपाठी ने कहा कि यदि कॉलेज प्रशासन ने पीड़िता के आरोपों पर तुरंत कार्रवाई की होती तो यह घटना टाली जा सकती थी. उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि प्रिंसिपल एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन उन्हें इस मुद्दे को सुलझाने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी. पीड़िता ने 11 दिनों तक इंतजार किया था.”

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