Mangla Gauri Vrat 2025: सावन का पहला मंगला गौरी व्रत है आज, जानें पूजन का शुभ मुहूर्त और उपासना विधि – first mangla gauri vrat 2025 know pujan ka shubh muhurat and upasna vidhi tvisg


Mangla Holes vrat 2025: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है. लेकिन, इसके साथ ही मां पार्वती की आराधना के लिए सावन में मंगला गौरी व्रत भी किया जाता है. कहा जाता है कि इस समय में चातुर्मास में भगवान शिव और मां पार्वती दोनों पृथ्वी के भ्रमण पर होते हैं. आप इस समय में श्रावण माह में भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना करके उनसे उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं. 15 जुलाई यानी आज मंगला गौरी का पहला व्रत है.

पवित्र महीना सावन में जितना महत्व सोमवार के दिन का है उतना ही मंगलवार के दिन का भी बताया गया है. सावन सोमवार के दिन जहां महादेव की पूजा की जाती है, वहीं सावन मंगलवार के दिन माता पार्वती के मंगलगौरी स्वरूप की पूजा होती है.

Mangla Gauri vrat की शुभ मुहूर्ट (Mangla Gauri vrat 2025 Subh Muhurat)

माता पार्वती की पूजा सुबह से लेकर प्रदोष काल तक की जा सकती है.

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4 बजकर 12 मिनट से लेकर 4 बजकर 52 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा.
प्रदोष काल- शाम 7 बजकर 21 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 22 मिनट तक

मंगला गौरी व्रत की पूजन विधि (Mangla Gauri Vrat puja ki Vidhi)

मां मंगला गौरी का व्रत अविवाहित लड़कियां भी कर सकती हैं और अपने लिए सुयोग्य वर की मां से प्रार्थना कर सकती हैं. मां मंगला गौरी के व्रत रखने के साथ साथ, आपको पहले संकल्प लेना है. फिर, स्नानादि से निवृत्त होने के बाद आपको भगवान शिव के जलाभिषेक और इस व्रत की पूजा पाठ के पूरे नियम की शुरुआत करनी है. फिर, मां पार्वती को चुनरी चढ़ाएं और उनको भेंट स्वरूप श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करें. उनको हरी चूड़ियां और बिंदी अर्पित करें. इसके साथ ही उनका गठबंधन भी जरूर करें. फिर, भगवान शिव को पीला चंदन अर्पित करें है और वहीं मां पार्वती को आप सिंदूर जरूर लगाएं. इसके बाद, मां पार्वती को पुष्प चढ़ाएं और फल-फूल से भोग लगाएं.

मंगला गौरी व्रत महत्व (Mangla Gauri Vrat Significance)

मंगला गौरी का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. माना जाता है कि श्रावण मास के दौरान मंगला गौरी की पूजा करने से मनचाही इच्छा पूरी होती है और सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. साथ ही, अविवाहित कन्याओं के लिए भी यह व्रत विवाह की बाधाओं को दूर कर मनपसंद जीवनसाथी दिलाने में मददगार साबित होता है. इसके अलावा, यह व्रत संतान संबंधी समस्याओं के समाधान में भी लाभकारी माना जाता है.

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