उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के महुली थाना क्षेत्र के नगुआ गांव में एक दलित वारंटी की पुलिस हिरासत में संदिग्ध हालात में मौत हो गई. मृतक राम किशुन (उम्र लगभग 65 वर्ष) पर 2011 में हुए एक मारपीट के मामले में न्यायालय से वारंट जारी हुआ था. परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने मंगलवार सुबह उन्हें जबरन घर से उठाया, जबकि वह गंभीर रूप से बीमार थे.

परिजनों के मुताबिक, सोमवार शाम पुलिस ने गांव के दो लोगों मतई और राम किशुन को वारंट का हवाला देकर चौकी में पेश होने का निर्देश दिया था. अगले दिन सुबह करीब 8 बजे शनिचरा बाबू चौकी के प्रभारी दो सिपाहियों के साथ पहुंचे और राम किशुन को जबरदस्ती बाइक पर बिठाकर चौकी ले गए. बीमार राम किशुन को दवा तक नहीं खाने दी गई.

यह भी पढ़ें: संत कबीर नगर में 3.25 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश, 46 संस्थानों के खिलाफ केस दर्ज

चौकी पहुंचते ही उनकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें पास के एक निजी चिकित्सक के पास ले जाया गया. मगर, डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. परिजन का आरोप है कि इसके बाद पुलिस शव को क्लिनिक में ही छोड़कर वहां से निकल गई. घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण उग्र हो गए और नगुआ गांव में भारी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई.

संत कबीर नगर

राम किशुन के चार बेटे दिल्ली में काम करते हैं, उनकी अनुपस्थिति में परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया. घंटों बाद अधिकारियों की समझाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी. परिजनों के आरोपों की भी जांच कराई जा रही है. फिलहाल, नगुआ गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *