भारत के मशहूर फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे के पैतृक घर को तोड़े जाने को लेकर बांग्लादेश के एक वरिष्ठ अधिकारी का बयान सामने आया है. बांग्लादेश के अधिकारी ने बताया है कि मैमनसिंह में जिस घर को ढहाया गया है, वह सत्यजीत रे के परिवार से जुड़ा हुआ नहीं था.

मैमनसिंह के डिप्टी कमिश्नर मोफिदुल आलम ने पुष्टि की कि स्थानीय प्रशासन ने जांच के बाद यह पुख्ता किया है कि जिस घर को ढहाया गया, उसका सत्यजीत रे के पूर्वजों से कोई संबंध नहीं था.

आलम ने कहा कि मैमनसिंह में जिस घर को ढहाया गया, हमने उसकी वास्तविकता का पता लगाने के लिए बुधवार को एक मीटिंग की थी. हमने स्थानीय लोगों से भी बातचीत की और ऐतिहासिक दस्तावेज भी खंगाले. जिस घर को ढहाया गया, उसे मैमनसिंह चिल्ड्रन अकादमी के ऑफिस के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता था.

स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की कि सत्यजीत रे के घर को स्थानीय तौर पर दुरलोव हाउस के तौर पर जाना जाता है, जो सही अवस्था में है. उसे छुआ तक नहीं गया.

आलम ने कहा कि हमें पता चला है कि सत्यजीत रे की पैतृक संपत्ति सही-सलामत है. हमने उसके मौजूदा मालिक से बात की है, जिन्होंने पुष्टि की है कि उन्होंने इस मकान को सीधे सत्यजीत रे के परिवार से खरीदा था और यह सिद्ध करने के लिए उनके पास सभी दस्तावेज हैं. जिस घर को ढहाया गया है, उसे गलती से सत्यजीत रे का पैतृक आवास समझ लिया गया है.

बता दें कि सत्यजीत रे के आवास को लेकर यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब कुछ न्यूज रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सत्यजीत रे के दादा और प्रसिद्ध लेखक उपेंद्र किशोर रे चौधरी द्वारा बनवाए गए सदी पुराने घर को नष्ट कर दिया गया था.

यह घर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था और लगभग एक दशक से बिना इस्तेमाल के पड़ा था. पहले इसमें मयमनसिंह शिशु अकादमी हुआ करती थी, लेकिन बाद में इसे लावारिश छोड़ दिया गया. एक बांग्लादेशी अधिकारी ने स्थानीय मीडिया को बताया कि नई योजना में शिशु अकादमी का संचालन फिर से शुरू करने के लिए उस जगह पर एक नई इमारत का निर्माण करना प्रस्तावित है. इसके लिए पुरानी इमारत को ध्वस्त किया जाना है.

बता दें कि सत्यजीत रे को विश्व सिनेमा के बड़े फिल्मकारों में से एक माना जाता है. वह फिल्म डायरेक्टर होने के साथ-साथ लेखक, संगीतकार और चित्रकार भी थे. बांग्लादेश में सत्यजीत रे का पैतृक घर लगभग 100 साल पहले उनके दादा उपेंद्रकिशोर रे ने बनवाया था. साल 1947 में भारत के बंटवारे के बाद यह संपत्ति तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान के अधीन हो गई थी. पूर्वी पाकिस्तान तब पाकिस्तान का हिस्सा था. भारत के साथ 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की हार के बाद पूर्वी पाकिस्तान, बांग्लादेश के रूप में एक नया मुल्क बना.

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