भारत और नेपाल देश के सीमाएं आपस में सटी हुई हैं, दोनों देशों के नागरिके एक दूसरे के देश में घूमने-फिरने शॉपिंग करने आते-जाते हैं. इसके अलावा कई नेपाली इंडिया में बिजनेस भी करते हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी नेपाली नागरिक को भारत की नागरिकता मिल सकती है? और किन शर्तों पर उसे भारत में मतदान (वोट देने) का अधिकार प्राप्त हो सकता है? आइए आपको बताते हैं.

नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार, कोई भी भारतीय नागरिक, जो स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता प्राप्त करता है वे विदेशी नागरिकता प्राप्त करने पर भारतीय नागरिक नहीं रह जाता. यानी कि अगर किसी व्यक्ति के पास किसी दूसरे देश की नागरिकता है और वे भारत का नागरिक बनना चाहता है तो उसे पहले दूसरे देश की नागरिकता छोड़नी पड़ेगी. लेकिन वे भारत के विदेशी नागरिक के रूप में नागरिकता ले सकता है.

OCI क्या है?

अगर कोई व्यक्ति दूसरे देश की नागरिकता नहीं छोड़ना चाहता और भारत का नागरिक भी बनना चाहता है तो उसे विदेशी भारतीय नागरिकता (OCI) दी जाएगी, लेकिन इससे उन्हें भारत में वोट देने का अधिकार नहीं मिलेगा. ओसीआई (OCI) का मतलब है Overseas Citizenship of India, यानि भारत के विदेशी नागरिक.

दो देश की नागरिकता मिलेगी, लेकिन वोट देने का अधिकार नहीं

भारत सरकार ने विदेशी भारतीय नागरिकता (OCI) प्रदान करने का प्रावधान बनाया है. भारत की संसद ने अगस्त, 2005 में इस संबंध में संबंधित विधेयक को मंजूरी दी थी. कुछ श्रेणियों के भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) जो भारत से प्रवास कर गए हैं और पाकिस्तान और बांग्लादेश के अलावा किसी अन्य विदेशी देश की नागरिकता प्राप्त कर ली है, वे OCI प्रदान करने के पात्र हैं. बशर्ते उनके गृह देश अपने संबंधित राष्ट्रीय कानूनों के तहत किसी न किसी रूप में दोहरी नागरिकता की अनुमति देते हों.

भारत के विदेशी नागरिक के रूप में पंजीकृत व्यक्तियों को लोकसभा/राज्यसभा/विधानसभा/परिषद, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय/उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आदि जैसे संवैधानिक पदों पर मतदान करने या निर्वाचित होने का अधिकार नहीं होगा. अगर किसी व्यक्ति के पास नेपाल की नागरिकता है और साथ ही भारत की विदेशी नागरिकता है तो वे भारत में वोट नहीं दे पाएगा.

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