आयुर्वेद में कई चीजों को खाने और उनसे होने वाली समस्याओं के बारे में बताया गया है. खीरा, मूली, आंवला, नींबू, दही, छाछ, छोले, राजमा, उड़द की दाल जैसे भोज्य पदार्थों का सेवन ठीक प्रकार से नहीं करने पर वात और कफ विकार बढ़ सकते हैं, खासकर अर्थराइटिस जैसी बीमारियों में. स्वामी रामदेव से जानते हैं कि आपको किस समय क्या नहीं खाना चाहिए. आइए जानते हैं इस बारे में…

स्वामी रामदेव का कहना है कि, खीरा वात रोग बढ़ाता है और रात को मूली खाने से स्थिति बिगड़ सकती है. दही और छाछ कुछ रोगों में लाभकारी होते हुए भी कई बार निषिद्ध हैं. उड़द की दाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लोकप्रिय है, मगर वात रोग में इसे नहीं खाना चाहिए.

खाने-पीने में मसाले, खासतौर पर लाल मिर्च और खटाई (इमली, नींबू, आम का अचार), पर कड़ाई से रोक लगाई है क्योंकि ये पित्त और वात को बढ़ाकर स्वास्थ्य को बिगाड़ सकते हैं. आम का रोग होने पर आम खाना पूरी तरह मना है.

इमली की खटाई और लाल मिर्च के सेवन से भी सेहत बिगड़ती है. जबकि आम के पने व मीठी सब्जी थोड़ी मात्रा में खाई जा सकती है.

स्वामी रामदेव यह भी बताते हैं कि पारंपरिक आयुर्वेदिक नियमों के अनुसार डाइट को कंट्रोल करना बहुत जरूरी होता है. दूध और नमक का कॉम्बिनेशन भी कई रोगों में हानिकारक हो सकता है. स्वामी रामदेव ने खाने की बराबर मात्रा खाने पर भी जोर दिया है.

स्वामी रामदेव ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार दिन में एक बार खाना सर्वोत्तम है, दो बार मेहनतकश या कड़ी मेहनत करने वालों के लिए सही है, जबकि तीन या चार बार भोजन करने से रोग और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए, आजकल ज्यादातर लोग अनुचित खानपान के चलते बीमार हो रहे हैं. स्वामी रामदेव मानते हैं कि उचित भोजन और परहेज से ही रोगमुक्त जीवन संभव है.

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