राहुल गांधी महाराष्ट्र में ही वोटों की चोरी की बात क्यों कर रहे हैं, हरियाणा-दिल्ली की क्यों नहीं? – rahul gandhi vote theft allegation in maharashtra and karnataka not haryana delhi opnm1


राहुल गांधी बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुद्दा अपनी स्टाइल में उठा रहे हैं. वो केंद्र की बीजेपी सरकार पर ‘वोटों की चोरी’ का आरोप लगा रहे हैं. वोटिंग में गड़बड़ी का इल्जाम तो राहुल गांधी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद से ही लगाने लगे थे, लेकिन अब ज्यादा जोरदार तरीके से उसे उठा रहे हैं.

कांग्रेस बिहार चुनाव आरजेडी के साथ महागठबंधन के बैनर तले लड़ने जा रही है. जैसे आरजेडी के सपोर्ट में राहुल गांधी जाति जनगणना का मुद्दा उठा रहे थे, SIR का मुद्दा भी वैसे ही उठा रहे हैं. राहुल गांधी महाराष्ट्र चुनाव में गड़बड़ी के साथ ही कर्नाटक की एक केस स्टडी भी बता रहे हैं.

SIR को लेकर तेजस्वी यादव तो चुनाव बहिष्कार तक की धमकी तक देने लगे हैं, लेकिन अभी आखिरी फैसला लिया जाना बाकी है. SIR के मुद्दे पर राहुल गांधी के बयानों पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने जवाबी हमला किया है. कहते हैं, उनका बयान बता रहा है कि उनको अपने पिता द्वारा पारित कानून की जानकारी नहीं है… युवा मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए ये कानून राजीव गांधी का पारित कराया हुआ कानून है… 2003 में भी बिहार में ऐसा ही SIR किया गया था.

ये मुद्दा अब ज्यादा तूल पकड़ता जा रहा है, लेकिन पहले SIR का विरोध नहीं बल्कि इसकी टाइमिंग पर सवाल उठाये जा रहे थे. और, सवाल तो एनडीए के सहयोगी दल टीडीपी नेता एन. चंद्रबाबू नायडू भी उठा चुके हैं. वो भी चुनाव से ठीक पहले SIR कराये जाने के खिलाफ हैं.

विरोध का सबका अपना तरीका होता, अपना हिसाब होता है. वक्त का तकाजा भी होता है. राहुल गांधी के साथ भी ऐसा ही है. और, राहुल गांधी के सवाल उठाने पर जम्मू-कश्मीर में उनके गठबंधन सहयोगी उमर अब्दुल्ला भी सवाल उठा चुके हैं – और राहुल गांधी के स्टैंड पर सवाल खड़े होने की वजह भी यही है.

देखा जाये तो महाराष्ट्र की ही तरह उसके पहले और बाद में, हरियाणा और दिल्ली में भी विधानसभा चुनाव हुए हैं. नतीजे भी मिलते जुलते ही आये हैं – फिर राहुल गांधी को ऐसा क्यों लगता है कि चोरी सिर्फ महाराष्ट्र में हुई है.

वोटों की चोरी कैसे हुई?

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर आरोप लगाया है कि देश में चुनाव चोरी किए जा रहे हैं. और, घोषणा की है कि इस मामले में विपक्षी गठबंधन INDIA चुप नहीं बैठने वाला है. विपक्ष संसद से सड़क तक लड़ाई लड़ेगा. संसद परिसर में मीडिया से मुखातिब राहुल गांधी ने कहा, ये सिर्फ बिहार की बात नहीं है… महाराष्ट्र में भी चोरी की… हमने चुनाव आयोग से मतदाता सूची मांगी, वीडियो मांगे… लेकिन हमें नहीं दिया.

राहुल गांधी का दावा है कि महाराष्ट्र में चुनाव से पहले एक करोड़ नये वोटर जोड़े गये. और, सरकार ने वीडियोग्राफी देने का कानून ही बदल दिया. राहुल गांधी ये आरोप पहले भी लगा चुके हैं, और बिहार में मुद्दा बनने पर दोहराने लगे हैं.

राहुल गांधी इस सिलसिले में एक केस स्टडी का भी हवाला दे रहे हैं. कहते हैं, कर्नाटक में हमने अध्ययन किया है, और भयंकर चोरी पकड़ी है… मैं ब्लैक एंड व्हाइट में आपको, और चुनाव आयोग को बता सकता हूं कि कहां और कैसे चोरी की जा रही है? हम खेल समझ गए हैं.

राहुल गांधी ने आगे बताया, हमने कर्नाटक में एक निर्वाचन क्षेत्र चुना, और उसे पूरी तरह से समझा… छह महीने लगे और हमने चुनाव चोरी करने का इनका सारा सिस्टम समझ लिया है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल साइट X पर लिखा है, ‘हिंदुस्तान में इलेक्शन चोरी किए जा रहे हैं, ये सच्चाई है! महाराष्ट्र में कैसे मैच फिक्सिंग हुई, हमने सबको दिखाया. कर्नाटक की एक लोकसभा सीट की जांच की – वहां बड़े पैमाने पर वोट चोरी मिली, जल्द जनता के सामने लाएंगे. बिहार में SIR के नाम पर SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक भाइयों-बहनों के वोट चुराए जा रहे हैं. हम चुप नहीं बैठेंगे… INDIA गठबंधन जन अधिकार की लड़ाई संसद से सड़क तक लड़ेगा.

सिर्फ महाराष्ट्र में ही ऐसा क्यों हुआ?

राहुल गांधी महाराष्ट्र में वोटों की चोरी का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन केस स्टडी के लिए कर्नाटक की लोकसभा सीट चुनी जाती है. क्या ये केस स्टडी महाराष्ट्र में नहीं हो सकती थी? क्या ऐसी केस स्टडी के लिए राज्य में कांग्रेस का सत्ता में होना भी जरूरी है? या कोई और बात है?

क्या कर्नाटक में राहुल गांधी ने केस स्टडी इसलिए कराई क्योंकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को वहां महाराष्ट्र जैसी कामयाबी नहीं मिल पाई थी? और क्या महाराष्ट्र में राहुल गांधी ने केस स्टडी इसलिए नहीं कराई क्योंकि वहां कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं?

जब राहुल गांधी ने पहले ये मुद्दा उठाया था, तो जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस नेता को आड़े हाथों लिया था. उमर अब्दुल्ला का कहना था, अगर आपको ईवीएम के साथ समस्या है, तो आपको हर चुनाव में इससे समस्या होनी चाहिए.

चुनावी जीत और हार को लेकर अपनी ही मिसाल देते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा था, मैं ​लोकसभा चुनावों में हार गया था, और विधानसभा चुनाव में जीता… मेरी पार्टी को बहुमत मिला… दोनों ही नतीजों को मैंने स्वीकार किया, और कभी ईवीएम को दोष नहीं दिया.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के साथ बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘जब उसी EVM से आपके सौ से ज्यादा सांसद चुनकर आते हैं, तो आप अपनी पार्टी की जीत के रूप में सेलिब्रेट करते हैं… आप कुछ दिन बाद पलटकर ये नहीं कह सकते कि हमें ईवीएम से वोटिंग पसंद नहीं है… क्योंकि, अब चुनाव परिणाम वैसे नहीं आ रहे जैसा हम चाहते हैं.’

अगर राहुल गांधी कर्नाटक में किसी लोकसभा सीट पर वोटों की चोरी का फॉर्मूला समझ लेते हैं, तो उत्तर प्रदेश में बीजेपी की कम सीटों पर कुछ क्यों नहीं कहते? 2024 के आम चुनाव में बीजेपी अपने बूते बहुमत भी नहीं हासिल कर पाई थी, यूपी में उसकी सीटें बिल्कुल कम हो गई थीं, और अयोध्या की सीट भी हार गई थी.

राहुल गांधी ने झारखंड विधानसभा चुनाव पर भी सवाल नहीं उठाया, जो महाराष्ट्र चुनाव के साथ ही हुए थे. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सबसे ज्यादा सीटें जीती थी, लेकिन झारखंड में पूरी तरह चूक गई थी.

महाराष्ट्र से पहले हरियाणा में विधानसभा चुनाव हुए थे, और महाराष्ट्र के बाद दिल्ली में – महाराष्ट्र के साथ साथ हरियाणा और दिल्ली में भी बीजेपी ने चुनाव जीतकर सरकार बना ली है, लेकिन राहुल गांधी सिर्फ महाराष्ट्र का ही नाम ले रहे हैं – महत्वपूर्ण सवाल सिर्फ यही है.

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