हरिद्वार मनसा देवी मंदिर स्टैम्पेड: सावन का पवित्र महीना चल रहा है. इस पवित्र महीने में आस्था का सैलाब उत्तराखंड का हरिद्वार में देखने को मिलता है. भक्त शिवालयों की ओर उमड़ते हैं, हरियाली और भक्ति के संगम से उत्तराखंड का हरिद्वार गूंजता है. 27 जुलाई यानि आज का दिन एक आम दिन की तरह था, जो कभी आम नहीं रह गया. हर रोज की तरह हजारों श्रद्धालु श्री माता मानसा देवी के मंदिर दर्शन करनी पहुंची थी. लोग खुद और परिवार के लिए मन्नत मांगने आए थे. लेकिन किसी पता थी कि मंदिर दर्शन के दौरान इतनी बड़ी अप्रिय घटना घट जाएगी.

रविवार सुबह क़रीब 8 से 9 बजे के बीच श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मनसा देवी पहुंचने लगी. सुबह क़रीब लगभग 10 बजे भीड़ और बढ़ गई. सुबह 11 बजकर 39 मिनट से 11 बजकर 44 मिनट के बीच मंदिर के सीढ़ी मार्ग पर अचानक भगदड़ मच गई. कई रिपोर्ट्स के अनुसार, करंट फैलने का अफवाह फैल गया जिसके कारण वहां अफरा-तफरा मच गई.

इस अफरा-तफरी में छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और कई घायल हो गए. घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया. घायलों में छोटे बच्चे भी शामिल हैं. मंदिर मार्ग में चीखें और रोने की आवाजें सुनाई देने लगीं. यह पूरा नजारा किसी पूरे सपने से कम नहीं था.

दोपहर 12 बजे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर दुख प्रकट करते हुए मुआवजे का ऐलान किया. प्रदेश सरकार द्वारा मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाने बीत कही गई.

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ये हादसा हृदय विदारक है और इसके जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश दिए. फिर उन्होंने मंदिर मार्ग पर हुई दुघर्टना में घायल हुए लोगों और उनके परिजनों से मुलाकात की.

भगदड़ के बाद पुलिस और एसडीआरएफ के जवान घटनास्थल पर मौजूद (Photo: PTI)

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भगदड़ के दौरान मची अफरातफरी और चीख-पुकार

भगदड़ के दौरान का एक वीडियो भी सामने आया है. जिसमें भगदड़ के दौरान मची अफरातफरी और चीख-पुकार को साफ़ सुना जा सकता है. मंदिर के बाहर रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में एक व्यक्ति भीड़ को ‘पीछे जाओ, पीछे जाओ’ कहते हुए लोगों को शांत करने की कोशिश करता दिखाई देता है.

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे श्रद्धालु जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आ रहे हैं और कुछ लोग पास की दीवारों और ढांचों पर चढ़ने की कोशिश कर रहे हैं ताकि भीड़ से बच सकें.

घायलों को अस्पताल ले जाते हुए (Photo: PTI)

सीढ़ियों पर चप्पलें बिखरी थीं, चूड़ियों के टुकड़े पड़े थे. साड़ियों के पल्लू और बच्चों के खिलौने बिखरे पड़े थे. वह मंदिर परिसर, जहां हर रोज ‘शुभ’ की कामना की जाती थी, आज ‘अशुभ’ की चुप्पी ओढ़े बैठा था.

जिंदगी की नाजुक डोर

हरिद्वार में हुआ ये हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं थी. ये दुर्घटना हमें उस सच्चाई से अवगत कराती है कि जिंदगी कितनी नाजुक है. हम भविष्य को लेकर सपने देखते हैं. लेकिन ये पता नहीं होता कि अगले पल क्या होता है. मनसा देवी में पूजा करने आए श्रद्धालु अपने संतान, पत्नी, माता-पिता, नौकरी, शांति के लिए भगवान के द्वार पर आए थे. लेकिन किसी ने सोचा नहीं था कि इतना बड़ा हादसा हो जाएगा.

सीढ़ियों पर बिखरी चप्पलें और चूड़ियों के टुकड़े (Photo: PTI)

व्यवस्था पर सवाल

इस हादसे ने मंदिर प्रशासन और सरकार के व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में पूजा करने आते हैं. सामान्य दिनों में भी यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. सावन के महीने में ये संख्या और बढ़ जाती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख किया प्रकट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर दुख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताई. उन्होंने कहा, ‘हरिद्वार के मां मनसा देवी मंदिर में भगदड़ के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना. घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं. स्थानीय प्रशासन सभी प्रभावितों की सहायता कर रहा है.’

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