Janki Mandir Sitamarhi: 31 नदियों का जल, 21 तीर्थों की मिट्टी से बनेगा जानकी मंदिर, सीतामढ़ी में श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं

ByCrank10

August 7, 2025



Janki Mandir Sitamarhi: बिहार के सीतामढ़ी जिले के पुनौराधाम में माता सीता को समर्पित भव्य जानकी मंदिर के निर्माण का शिलान्यास शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों किया जाएगा. यह आयोजन अयोध्या के राममंदिर की तर्ज पर भव्यता और श्रद्धा से परिपूर्ण होगा. मंदिर परिसर का निर्माण 67 एकड़ भूमि में किया जा रहा है, जिसकी कुल लागत 882.87 करोड़ रुपये है. मंदिर की ऊंचाई 151 फीट होगी और इसके 2028 तक तैयार होने की उम्मीद है.

भव्यता की छाया में धार्मिक आस्था

इस ऐतिहासिक अवसर को और दिव्य बनाने के लिए जयपुर से चांदी का कलश, देश के 21 तीर्थ स्थलों की मिट्टी, और 31 नदियों का जल मंगवाया गया है. तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर 50 हजार लड्डू पैकेट तैयार किए जा रहे हैं, जिसके लिए दक्षिण भारत से विशेष कारीगर सीतामढ़ी पहुंच चुके हैं. लड्डुओं के निर्माण से पूर्व गंगा समेत 11 पवित्र नदियों के जल से ‘संकल्प स्नान’ की रस्म अदा की जाएगी.

मंत्रोच्चार के बीच अमित शाह रखेंगे आधारशिला

शिलान्यास समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बिहार सरकार के मंत्री, केंद्र सरकार के प्रतिनिधि, साधु-संत, और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहेंगे. पूरे कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा, जिससे वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक रहेगा. राज्य सरकार और पर्यटन विभाग इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने में युद्धस्तर पर जुटे हैं.

सीता-मिथिला के गौरव का केंद्र बनेगा मंदिर

पुनौराधाम को माता सीता का जन्मस्थल माना जाता है, और इसी भावभूमि पर यह मंदिर भविष्य में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है. मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए अत्याधुनिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं.

प्रस्तावित सुविधाओं में शामिल हैं:

  • मुख्य मंदिर परिसर
  • सीता वाटिका और लवकुश वाटिका
  • भजन संध्या स्थल और यज्ञ मंडप
  • संग्रहालय और ऑडिटोरियम
  • कैफेटेरिया और बच्चों के लिए खेल क्षेत्र
  • धर्मशाला, यात्री अतिथि गृह, डॉरमेट्री भवन
  • ई-कार्ट स्टेशन और पार्किंग
  • मिथिला हाट और सांस्कृतिक प्रदर्शनी स्थल

इतिहास और श्रद्धा का मिलेगा संगम

मंदिर परिसर में माता सीता के जीवन से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों, प्रमाणों और कथाओं को डिजिटल माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस भूमि के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बेहतर ढंग से समझ सकें.

यह परियोजना न केवल मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करेगी, बल्कि राज्य के पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी नया आयाम देगी. पुनौराधाम का यह मंदिर मिथिला और भारत की आस्था का नया केन्द्र बनने की ओर बढ़ चला है. एक ऐसा स्थल, जहां श्रद्धा, परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम होगा.

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