टैरिफ को लेकर भारत के सामने ये 3 चुनौतियां, सरकार से मांग, Plan-B पर काम करे देश! – Tit for tat CTI On US Tariff writes letter to PM Narendra Modi says India should also impose on America tutc


अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी का एक्स्ट्रा टैरिफ (US Tariff On India) लगाते हुए इसे बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया है. ये अतिरिक्त टैरिफ 27 अगस्त से लागू होगा. Donald Trump के भारत पर इस एक्शन को लेकर व्यापारियों और उद्यमियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और चैंबर ऑफ ट्रेंड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को पत्र लिखकर अमेरिका पर भी जवाबी टैरिफ लगाने की मांग की है. इसके साथ ही व्यापारियों ने सरकार से स्थिति साफ करने के लिए कहा है. एक तरह से व्यापारियों के सामने ये फिलहाल ये चुनौतियां हैं.

1. फंसे हुए माल का आखिर क्या होगा?
अमेरिका द्वारा भारत पर किए जा रहे टैरिफ हमलों को लेकर भारत के व्यापारी वर्ग में जहां गुस्सा है, तो वहीं कन्फ्यूजन की स्थिति भी है. दिल्ली में व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेंड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि Trump की ओर से आए दिन टैरिफ बढ़ाने की धमकियों और 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ लगाए जाने को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग में एक बड़ा कन्फ्यूजन यह है कि जो कंपनियां यहां ऑर्डर ले चुकी हैं या फिर जो माल रास्ते में रुका है और इसे वहां पहुंचने में समय लगेगा, तो उसका क्या होगा.

2. भारत 50% टैरिफ से मुश्किल होगा कारोबार
गोयल ने आंकड़े गिनाते हुए बताया कि भारत ने बीते साल 2024 में अमेरिका को 1.7 लाख करोड़ के इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात किए थे. इनमें स्टील प्रोडक्ट्स, मशीनरी, ऑटो पार्ट्स शामिल होते हैं, अभी तक इन माल पर 10 फीसदी टैरिफ लगता था. मतलब अगर कोई सामान 100 डॉलर का है, तो वो US में 110 डॉलर में पड़ता था. लेकिन अब 25% टैरिफ के बाद ये 125 डॉलर और आगे 50% पर 150 डॉलर का पड़ेगा.

टैरिफ में इजाफे के चलते इन चीजों के निर्यात में 10-15 फीसदी की कमी आ सकती है. इसी तरह जेम्स एंड ज्वेलरी पर 10 फीसदी टैरिफ के साथ बीते साल 90,000 करोड़ रुपये का निर्यात किया गया था, लेकिन अब ये कारोबार भी प्रभावित होगा. उन्होंने कहा कि 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ से कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा.

3. फार्मा सेक्टर के लिए बढ़ेगी मुसीबत
तमाम सेक्टर्स के साथ ही भारतीय Pharma Sector के लिए भी चुनौतियां बढ़ गई हैं. फार्मा सेक्टर से पिछले साल 92,000 करोड़ रुपये की दवाइयों का निर्यात किया गया था और इस पर कोई टैरिफ नहीं था यानी ये जीरो था. इस पर टैरिफ बढ़ने से दवाई निर्यात महंगा होता और अमेरिका भारत का विकल्प तलाशेगा.

वियतनाम भी अमेरिका के लिए दवाइयों का बड़ा सप्लायर है, Trump Tariff के साथ-साथ भारत को वियतनाम से मिलने वाले चैलेंज से जूझना पड़ेगा. ऐसे में दवाई कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी. गोयल ने ये भी कहा कि इसका असर रोजगार पर भी दिखेगा और लाखों नौकरियां संकट में पड़ जाएंगी.

भारत भी लगाए जवाबी टैरिफ
भारत को वैसे भी केवल अमेरिका के भरोसे नहीं रहना चाहिए, भारत को अब प्लान-बी के तहत नए बाजारों को खोजना चाहिए. सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने जानकारी देते हुए बताया कि हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को पत्र लिखकर डिमांड की है कि जर्मनी, ब्रिटेन, सिंगापुर, मलेशिया जैसे देशों में इंजीनियरिंग गुड्स की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है, ऐसे में भारत को इन देशों में अपना माल बेचने के लिए विकल्प तलाशने चाहिए. इसके साथ ही भारत को भी अमेरिकी धमकी से डरने के बजाय वहां से आयात किए जाने वाले सामानों पर जवाबी टैरिफ लगाकर सबक सिखाना जरूरी है.

उन्होंने बताया कि मिनरल्स, व्हिस्की, वाइन और स्पिरिट्स,  पैकेज्ड फूड, महंगे रत्न, मेटल्स, न्यूक्लियर रिएक्टर्स और हवाई जहाज के पार्ट्स, इलेक्ट्रिकल उपकरण, ऑप्टिकल पार्ट्स, प्लास्टिक, केमिकल, नट्स ड्राईफ्रूट्स, आयरन, स्टील जैसे सामान बड़े पैमाने पर अमेरिका से भारत आते हैं, भारत को इन सब चीजों में अमेरिका की निर्भरता कम करते हुए दूसरे देशों के विकल्प तलाशने चाहिए.

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