जमुई में वोटर लिस्ट का घोटाला, एक पते पर 230 मतदाता, मृतकों के भी नाम शामिल


बिहार न्यूज: जमुई जिले के आमीन गांव में मतदाता सूची संशोधन के दौरान ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने स्थानीय लोगों से लेकर प्रशासन तक को कटघरे में खड़ा कर दिया है. एक ही मकान संख्या-3 के पते पर 230 लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए, जिनमें से कई लोग 3 से 5 साल पहले ही गुजर चुके थे.

गांव के लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार बीएलओ ने घर-घर जाकर सत्यापन करने की बजाय गांव के बाहर बैठकर ही फॉर्म भर दिए और पूरी वोटर लिस्ट में गड़बड़ी फैला दी.

एक पते पर 230 नाम

जमुई मुख्यालय से लगभग 12 किमी दूर आमीन गांव में मतदाता सूची संशोधन कार्य में चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है. यहां चौड़ीहा पंचायत के वार्ड संख्या-3 को बीएलओ ने मकान संख्या-3 मानकर एक ही पते पर 230 लोगों के नाम दर्ज कर दिए.

गांव वालों का कहना है कि उनके यहां किसी भी घर पर मकान संख्या लिखी नहीं होती, सब लोग नाम और पहचान के आधार पर घर जानते हैं. लेकिन बीएलओ ने अपनी मर्जी से सभी को मकान संख्या-3 में दर्ज कर दिया.

मृतक भी “सक्रिय मतदाता” बने

गांव वालों के मुताबिक, लिस्ट में 10 से 15 ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं, जिनकी मृत्यु 3 से 5 साल पहले हो चुकी है. जैसे कि मो. अलीजान की पत्नी कौशल खातून, जिनका निधन तीन साल पहले हो गया था, उनका नाम भी नई वोटर लिस्ट में मौजूद है. ग्रामीणों ने इसे न सिर्फ लापरवाही बल्कि मतदाता सूची की साख पर चोट बताया है.

गांव में आए, लेकिन घर में नहीं गए

गांव के निवासी के मुताबिक, बीएलओ राजीव कुमार और गौतम कुमार गांव तो आए, लेकिन किसी के घर में नहीं गए. वे एक पेड़ के नीचे बैठ गए और वहीं से लोगों को बुलाकर फॉर्म भरने लगे. न तो पते की पुष्टि की, न दस्तखत लिए, और न कोई पूछताछ की.

ग्रामीणों को इस गड़बड़ी की जानकारी तब मिली जब उन्हें वोटर लिस्ट की फोटो कॉपी दिखाई गई. तब जाकर पता चला कि सैकड़ों लोगों का पता गलत दर्ज है और मृतक भी “जिंदा” हो गए हैं.

बीएलओ ने सिस्टम पर डाला दोष

बीएलओ राजीव कुमार चौधरी ने सफाई देते हुए कहा कि यह सब “सिस्टम की तकनीकी खराबी” के कारण हुआ है. उन्होंने माना कि मृतकों के नाम लिस्ट में आना लापरवाही है, लेकिन खुद को दोषी मानने से इनकार किया. उनका कहना है कि वे प्रपत्र-7 के जरिए मृतकों के नाम हटवाएंगे और मकान संख्या की गड़बड़ी तकनीकी स्तर पर सुधारी जाएगी.

गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए और घर-घर जाकर पुनः सत्यापन किया जाए. साथ ही, चुनाव आयोग को तकनीकी खामियों को दूर करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की अपील की है.

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