Sahibganj Flood: साहिबगंज, सुनील ठाकुर-साहिबगंज और आसपास के क्षेत्रों में गंगा के जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने के कारण बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. बीते 24 घंटों में जलस्तर में लगभग एक मीटर से अधिक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है, जिससे शहर के कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस चुका है. भरतिया कॉलोनी, हबीबपुर, चानन, कबूतर खोपी जैसे मोहल्लों में पानी भर जाने से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. प्रभावित क्षेत्रों के लोग अब सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं. जिला परिषद उपाध्यक्ष सुनील यादव ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया और प्रभावित लोगों से बातचीत की.

नाव और राहत सामग्री तक की सुविधा नहीं

स्थानीय लोगों के अनुसार न तो प्रशासन की ओर से अब तक कोई नाव उपलब्ध करायी गयी है और न ही राहत सामग्री की व्यवस्था की गयी है. कई इलाकों में बाढ़ का पानी घरों में घुस चुका है. इससे खाना पकाने तक की सुविधा नहीं है. इसके अलावा मवेशियों के लिए चारे की भारी किल्लत है. बाढ़ प्रभावित भोला चौधरी, सखीचंद पासवान और मोहन रिखयासन जैसे ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासनिक सहायता के अभाव में लोग काफी परेशान हैं. कई गांवों में सड़क मार्ग पूरी तरह बाधित है, जिससे बाहर आना-जाना बेहद कठिन हो गया है.

बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा

साहिबगंज प्रखंड के विभिन्न बाढ़ प्रभावित गांवों का जिला परिषद उपाध्यक्ष सुनील यादव ने दौरा किया. उन्होंने सबसे पहले किशन प्रसाद गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं. इसके बाद उन्होंने मुसहरी टोला, लाल बथानी, मखमलपुर पंचायत सहित कई क्षेत्रों का दौरा किया. ग्रामीणों ने बताया कि किशन प्रसाद से लाल बथानी को जोड़ने वाली एकमात्र सड़क बाढ़ के पानी में डूब चुकी है. ग्रामीणों ने पुल निर्माण की मांग की, ताकि भविष्य में आवागमन की समस्या से निजात मिल सके.

बाढ़ प्रभावितों तक जल्द पहुंचे राहत सामग्री-जिला परिषद उपाध्यक्ष

मुसहरी गांव के लोगों ने नाव की अनुपलब्धता और प्रशासनिक सहायता के अभाव की शिकायत की. जिला परिषद उपाध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि वे इन सभी समस्याओं को जिला प्रशासन तक पहुंचाएंगे और अपनी ओर से भी हर संभव सहयोग देंगे. उन्होंने कहा कि कई गांवों में लोग चूल्हा तक नहीं जला पा रहे हैं और रहने की भी गंभीर समस्या है. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि राहत सामग्री जल्द से जल्द बाढ़ प्रभावितों तक पहुंचाई जाए.

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