आर्मी कैंप, हेलीपैड, सड़क… सब जलमग्न, धराली की तबाही के बाद हर्षिल में झील बनी नई आफत – Uttarkashi Dharali flash flood disaster update cloud gathering new danger rescue operation Aid Dhami govt ntc

ByCrank10

August 9, 2025


Uttarkashi Dharali flash floods update: उत्तरकाशी के धराली गांव में आई आपदा के बाद हालात अब भी गंभीर हैं. धराली तक जाने वाले सभी रास्ते टूट और बह चुके हैं. सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं. अब तक 931 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, और यह संख्या लगभग 1000 तक पहुंच रही है. हालांकि, धराली और हर्षिल इलाके में अभी भी करीब 250 लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने का काम जारी है.

लोगों का सुरक्षित स्थानों पर पहुंचना

जिन्हें बचाया गया है, उन्हें पहले हर्षिल और मातली लाया जा रहा है, फिर वहां से देहरादून भेजा जा रहा है. पर्यटकों का रेस्क्यू लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन मजदूर और स्थानीय लोग, जो धराली और गंगोत्री में काम कर रहे थे, उनका निकालना जारी है.

सड़क मार्ग पूरी तरह बाधित

धराली तक मशीनें नहीं पहुंच पाई हैं क्योंकि कई जगह सड़के पूरी तरह बह चुकी हैं. कुछ स्थानों पर 4–5 किलोमीटर का रास्ता पूरी तरह गायब हो गया है. इन्हें जोड़ने में कई दिन लग सकते हैं. फिलहाल, वायुसेना की मदद से हवाई रास्ते से जरूरी सामान और मशीनें लाई जा रही हैं.

सरकारी मदद और निर्णय

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की है कि आपदा में मारे गए लोगों के परिजनों को 5 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी. पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के मालिकों को भी 5 लाख रुपये की मदद मिलेगी. इसके अलावा, प्रभावित गांवों के पुनर्वास और आजीविका सुधार के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जो एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी.

यह भी पढ़ें: उत्तरकाशी: धराली आपदा पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर पुलिस ने कसा शिकंजा, चार पर FIR दर्ज

हर्षिल का हाल

संवाददाता आशुतोष मिश्रा के अनुसार, हर्षिल अब ‘घोस्ट टाउन’ जैसा दिख रहा है. होटल, गेस्ट हाउस और घर खाली हो चुके हैं. बिजली और संचार व्यवस्था हाल ही में बहाल हुई है. स्थानीय किसान चिंतित हैं, क्योंकि उनके सेब के बागान तैयार हैं, लेकिन रास्ते बंद होने से फसल बाजार तक नहीं पहुंच पा रही है.

मरम्मत और बहाली कार्य के बीच बचाव कर्मी (Photo: PTI)

आशुतोष ने जानकारी दी कि हर्षिल इस समय बड़ा बेस कैंप बना हुआ है. जितने भी हिल ऑपरेशन्स चल रहे हैं, उनका संचालन यहीं से किया जा रहा है. गंगोत्री से बड़ी संख्या में मज़दूरों का आना जारी है. आज सुबह करीब 300 से ज्यादा लोगों को यहां से इवैक्यूएट कर मताली, फिर उत्तरकाशी और उसके बाद जौलीग्रांट भेजा गया है.

पर्यटकों का इवैक्यूएशन लगभग पूरा हो चुका है. अब मुख्य रूप से वे मजदूर और श्रमिक निकाले जा रहे हैं जो उत्तरकाशी और हर्षिल में कार्यरत थे. धराली और गंगोत्री में फंसे लोग भी धीरे-धीरे यहां पहुंच रहे हैं और उनका इवैक्यूएशन जारी है.

सड़क मार्ग की स्थिति बेहद खराब है. कई जगहों पर सड़कें पूरी तरह से गायब हो चुकी हैं. पांच-पांच किलोमीटर लंबे स्ट्रेच में घाटी पार करना बेहद मुश्किल है. कई जगहों पर सैलाब ने सड़क का नामोनिशान मिटा दिया है. इन मार्गों को जोड़ने में 4–5 दिन से ज्यादा का समय लग सकता है.

यही कारण है कि यहां एक एयर पैसेज तैयार किया गया है. वायुसेना के जरिए जरूरी सामान, जेनरेटर और मशीनें (जैसे JCB) यहां पहुंचाई जा रही हैं. इलाके की दुर्गमता और तबाही को देखते हुए यही फिलहाल राहत और बचाव का सबसे कारगर साधन है.

यह भी पढ़ें: अगले दो दिनों में पूरा हो जाएगा रेस्क्यू ऑपरेशन! जानें धराली में कैसे हैं ताजा हालात

धराली में बचाव कार्य

धराली के पास भागीरथी नदी पर मलबा जमा होने से एक तरह का अस्थायी बांध बन गया है. यहां बड़े-बड़े जेसीबी और एक्सकेवेटर रास्ता बनाने और मलबा हटाने में लगे हैं. सेना के कैंप बह जाने और जवानों के लापता होने की घटनाओं के बाद, उनकी तलाश के लिए डॉग स्क्वॉड और स्कैनर मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

पानी जमा होने से बना रहा जलाशय

राहत और बचाव के बीच अभी संकट पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है. जिस रास्ते से आए मलबे ने इलाके को तबाह कर दिया. वहां अलकनंदा नदी का पानी जमा होने से जलाशय बन रहा है. जो इस संकट के बीच खतरे का संकेत दे रहा है. पूरा इलाका दलदल बन चुका है जहां चलना तक मुश्किल हो रहा है.

धराली से फंसे हुए लोगों को बचाया जा रहा (Photo: PTI)

रेस्क्यू टीम के सामने दो चुनौतियां हैं पहली यहां के हालात सामान्य किए जाएं जो कि पूरी तरह से तबाह हो चुका है तो वहीं दूसरी ओर चुनौती जिंदगियों को बचाने की भी जारी है. हर्षिल में सेना के कैंप को भी भारी नुकसान हुआ है. जहां लगातार हालातों को सामान्य करने की कोशिशें जारी हैं.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *