Raksha Bandhan 2025: इन 10 चीजों के बिना अधूरा है रक्षाबंधन, पूजा की थाली में जरूर रखें ये सामग्री – raksha bandhan 2025 keep these pujan samagri in the rakhi thali plate otherwise the worship of Rakhi will remain incomplete tvisg


Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन एक बहुत ही खास भारतीय पर्व है जो भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र और खुशहाली की प्रार्थना करती हैं. वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और उनका हमेशा ख्याल रखने का वचन देते हैं. यह त्योहार सावन के महीने में आता है, जो बारिश का मौसम होता है और पूरे भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. राखी बांधने की परंपरा बहुत पुरानी है और इसके पीछे कई कहानियां और लोककथाएं भी जुड़ी हुई हैं. हर वर्ष रक्षाबंधन का पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है और इस बार रक्षाबंधन का पर्व 9 अगस्त यानी आज मनाया जा रहा है.

रक्षाबंधन के पूजन की प्रक्रिया से अधिक जरूरी है रक्षाबंधन की थाली, जिसमें आरती और टीका करने के लिए सभी सामग्री सजाई जाती है. इस थाली का उपयोग भाई की आरती उतारने और उनकी कलाई पर राखी बांधने के लिए किया जाता है, जो इस पर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. तो चलिए जानते हैं कि रक्षाबंधन की थाली में कौन कौन सी पूजन सामग्री शामिल होनी चाहिए.

रक्षाबंधन की पूजन सामग्री (Raksha Bandhan 2025 Pujan Samagri)

रक्षाबंधन की पूजा के लिए सबसे पहले एक थाली तैयार करें. उस थाली में राखी के साथ-साथ अन्य पूजन सामग्री भी रखी जाती है. पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण सामग्री है राखी. इसके अलावा, थाली में कलश, नारियल, सुपारी, रोली, चंदन, अक्षत, दही, राखी और मिठाई रखें और घी का दीपक जलाएं. साथ ही, मिठाई या चॉकलेट जरूर रखनी चाहिए. मिठाई का महत्व इसलिए है, क्योंकि राखी बांधने के बाद भाई-बहन मिठाई खाते हैं जिसे खुशियों का प्रतीक माना जाता है. पूजा के लिए दीपक, अगरबत्ती और फल भी रखे जाते हैं.

रक्षाबंधन पूजन विधि (Raksha Bandhan 2025 Pujan Vidhi)

रक्षा बंधन के दिन भाई-बहन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और घर के मंदिर में पूजा-अर्चना करें. पूजा के बाद राखी बांधने के लिए आवश्यक सामग्री इकट्ठा करें और एक साफ थाली में सजाएं. सबसे पहले भगवान को राखी अर्पित करें और फिर भाई को पूर्व या उत्तर दिशा में बैठाकर तिलक लगाएं, राखी बांधें और आरती उतारें. इसके बाद भाई को मिठाई खिलाएं और आशीर्वाद लें. इस दौरान भाई-बहन दोनों का सिर ढका होना चाहिए.

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