फतेहपुर समाचार: फतेहपुर जिले के अबू नगर में एक पुराने मकबरे को लेकर सोमवार को विवाद खड़ा हो गया. बजरंग दल और कई अन्य हिंदू संगठनों के सदस्य यहां इकट्ठा होकर इसे मंदिर बताते हुए पूजा-पाठ की मांग करने लगे, जिसकी वजह से इलाके का माहौल तनावपूर्ण हो गया है. पुलिस बल मौके पर तैनात होकर हालात को काबू करने में जुटी हुई है.

बजरंग दल ने पूरा करने की दी चेतावनी

बजरंग दल के फतेहपुर जिला सह-संयोजक धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि हम दोपहर में यहीं पूजा करेंगे, प्रशासन हमें रोक नहीं पाएगा. यह हमारा मंदिर है जिसे वे मजार बता रहे हैं.

कानून व्यवस्था को नहीं होने देंगे प्रभावित- जिला मजिस्ट्रेट

घटना को लेकर जिला मजिस्ट्रेट रवींद्र सिंह ने कहा कि सभी को आश्वस्त किया गया है कि कानून-व्यवस्था को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा. लोग यहां से चले गए हैं और स्थिति सामान्य है. हमारी प्राथमिक चिंता शांति बनाए रखना है और जनता का पुलिस पर भरोसा है.

कानून बिगाड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

फतेहपुर के एसपी अनूप कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस पहले से ही मौके पर मौजूद थी और पूरी तैयारी की गई थी. कुछ लोगों के पास पत्थर और बेंत थे, लेकिन कोई हथियार नहीं थे. सभी लोग स्थान छोड़ चुके हैं. जिन्होंने कानून को हाथ में लिया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए झंडे हटाए गए

एसपी ने यह भी पुष्टि की कि प्रदर्शनकारियों द्वारा स्मारक पर लगाए गए हिंदू झंडे हटा दिए गए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वहां कोई झंडा नहीं है. प्रशासन ने दोहराया कि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश पर सख्त कार्रवाई होगी और क्षेत्र में शांति बहाल है.

हिंदू पक्ष का दावा

जानकारी के मुताबिक, फतेहपुर के आबू नगर स्थित रेडईया मोहल्ले में स्थित मकबरा सैकड़ों साल पुराना है. हिंदू संगठनों का दावा है कि यह स्थान पहले भगवान शिव और ठाकुर जी का मंदिर था, जिसे तोड़कर मकबरे में बदल दिया गया. उनका कहना है कि आज भी परिसर में शिवलिंग, नंदी की मूर्ति और दीवारों व गुंबदों पर त्रिशूल, फूल समेत अन्य हिंदू धार्मिक चिन्ह मौजूद हैं, जो उनके अनुसार मंदिर होने का प्रमाण देते हैं.

मुस्लिम पक्ष का दावा

हालांकि, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह मकबरा है, जो कि सैकड़ों साल पुराना है. बताया जाता है कि यहां अबू मोहम्मद और अबू समद की मजारें हैं, जिसके निर्माण में लगभग 10 साल लगे थे. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, खसरा नंबर 753 पर स्थित यह मकबरा ‘मकबरा मांगी’ के नाम से दर्ज है और राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में संरक्षित है.





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