mayawati bsp rakshabandhan – यूपी की गठबंधन राजनीति में क्‍या नई जान फूंक पाएगा बहनजी का रक्षाबंधन? – mayawati rakshabandhan politics bsp lalji tandon umashankar singh opnm1


मायावती को बहन जी बोल कर ही संबोधित किया जाता है. संगठन से लेकर सत्ता की राजनीति तक हर जगह ऐसा ही सुनने को मिला है. जैसे मुलायम सिंह यादव के बारे में बात करते हुए अखिलेश यादव भी नेताजी ही बोलते हैं, और यूपी के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए गोरखपुर से लेकर लखनऊ तक ‘महाराज जी’ कह कर भी संबोधित किया जाता है.

अब जिसे बहन जी कह कर ही बुलाया जाता हो, उसके लिए रक्षाबंधन का त्योहार तो और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. राजनीति में भी मायावती ने रक्षाबंधन की परंपरा लंबे समय तक निभाई है, और वो यूपी में गठबंधन की राजनीति का मजबूत रिश्ता रहा है – मायावती के राखी बांधने की सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी नेता लालजी टंडन को लेकर रही है.

बीते रक्षाबंधन पर मायावती को चर्चा में लाने वाले हैं बीएसपी के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह. बलिया के रसड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक उमाशंकर सिंह हाल ही में यूपी के मंत्री दयाशंकर सिंह के साथ विवाद को लेकर चर्चा में थे. उमाशंकर सिंह ने सोशल साइट एक्स पर मायावती से राखी बंधवाने की तस्वीर के साथ एक पोस्ट भी शेयर की है.

बीएसपी में रक्षाबंधन की शुरुआत

सोशल मीडिया पर आई तस्वीर में उमाशंकर सिंह मास्क लगाए अपनी पार्टी की नेता और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से राखी बंधवा रहे हैं. तबीयत ठीक न होने के कारण वो मास्क लगाए ही राखी बंधवाने पहुंचे थे. बीएसपी नेतृत्व के काफी करीबी माने जाने वाले उमाशंकर सिंह के बीमार होने पर मायावती ने उनके घर जाकर हालचाल लिया था.

बीएसपी विधायक ने अपनी पोस्ट में लिखा है, रक्षाबंधन के पावन अवसर पर परम आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी ने राखी बांधकर बड़ी बहन के रूप में अपना आशीर्वाद दिया… अपनी मुखिया, मार्गदर्शक, परम आदरणीय बहन मायावती जी का ऐसा आत्मीय प्रेम और आशीर्वाद पाना मेरे लिये किसी ईश्वरीय कृपा की अनुभूति और परम सौभाग्य का विषय है… आदरणीय बहन जी के इस आत्मीय प्रेम और आशीर्वाद के लिए मैं अपने हृदयतल से उनका कोटि-कोटि धन्यवाद एवं आभार प्रकट करता हूं.

मायावती की राजनीति में रक्षाबंधन की पुरानी परंपरा रही है. यूपी की राजनीति में मायावती और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के रिश्ते को बुआ-भतीजा कहा जाता रहा है. ये बात अलग है कि मायावती ने मुलायम सिंह यादव को कभी राखी नहीं बांधी थी.

मायावती और रक्षाबंधन की राजनीति

जेल से छूटकर आने के बाद एक बार चंद्रशेखर आजाद ने बीएसपी नेता को बुआ कह कर संबोधित किया था, तो मायावती ने मीडिया के सामने आकर साफ तौर पर बोल दिया कि वो किसी की बुआ नहीं हैं. चंद्रशेखर आजाद फिलहाल यूपी के नगीना से लोकसभा सांसद हैं.

परिवार से बाहर मायावती ने जिन लोगों को राखी बांधी है, तीन नाम चर्चित रहे हैं. बीएसपी की सरकार में मंत्री रह चुके करतार सिंह नागर और हरियाणा के INLD नेता अभय चौटाला को भी मायावती राखी बांध चुकी हैं – लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी नेता लालजी टंडन को राखी बांधने को लेकर रही है.

माना जाता है कि 1995 के गेस्ट हाउस कांड में मायावती की जान बचाने में लालजी टंडन की बड़ी भूमिका थी. तब से मायावती कई साल तक लालजी टंडन को अपना भाई मानते हुए हर रक्षाबंधन को राखी भी बांधती थीं. लेकिन, ये भी माना जाता है कि जब 2003 में बीजेपी और बीएसपी का गठबंधन टूट गया उसके बाद से मायावती ने लालजी टंडन को कभी राखी नहीं बांधी.

एक इंटरव्यू में राजनीति में रक्षाबंधन के सवाल पर मायावती का कहना था, मैं कभी किसी के घर राखी बांधने नहीं गई. मायावती ने बताया कि अगर कोई घर राखी ले के आए, तो वो भगा नहीं सकतीं इसलिए राखी बांध देती हैं.

उमाशंकर सिंह ने बीएसपी में बड़े दिनों बाद राखी बंधवाने की परंपरा शुरू की है. देखना होगा कि क्या आगे भी ये परंपरा जारी रहती है? बाहर न सही, क्या बीएसपी में ये परंपरा आगे बढ़ाई जाती है, ताकि संगठन को मजबूती मिले.

लालजी टंडन तो अब नहीं रहे, लेकिन लगता तो ऐसा ही है जैसे बीजेपी के साथ रक्षाबंधन का रिश्ता मायावती अब भी निभा रही हैं – चुनावों में तो उन ऐसी स्ट्रैटेजी अपनाने के आरोप भी लगते हैं, जिससे बीजेपी को मदद मिलती है, और उसकी राह आसार हो जाती है.

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