अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ जारी व्यापारिक विवाद के बीच टैरिफ की समय सीमा को अगले 90 दिनों के लिए बढ़ा दिया है. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सोमवार को सीएनबीसी को इसकी जानकारी दी.

यह कदम अमेरिका और चीन के बीच स्टॉकहोम में हुई हालिया व्यापार वार्ता के बाद आया है और इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव को कम करना है. बीजिंग और वाशिंगटन के बीच टैरिफ संघर्ष विराम 12 अगस्त को 12:01 बजे समाप्त होने वाला था.

इससे पहले मई में जिनेवा में हुई वार्ता के बाद दोनों देशों ने 90 दिनों के लिए ज्यादातर टैरिफ को स्थगित करने पर सहमति जताई थी. स्टॉकहोम में पिछले महीने हुई बातचीत के बाद यह संकेत मिलने लगे थे कि टैरिफ डेडलाइन बढ़ सकती है.

टैरिफ की समय सीमा क्यों बढ़ाई गई?

यह विस्तार 12 अगस्त को समाप्त हो रहे 90-दिनों के व्यापारिक समझौते के ठीक पहले आया है. यदि यह समय सीमा नहीं बढ़ाई जाती, तो अमेरिकी टैरिफ चीन से आने वाले सामानों पर अप्रैल में लगाए गए अपने सर्वोच्च स्तर पर वापस चले जाते.

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मई में दोनों देशों ने जिनेवा में हुई वार्ता के बाद टैरिफ को निलंबित करने पर सहमति जताई थी, जिसके तहत अमेरिका ने चीनी सामानों पर टैरिफ घटाकर 30% कर दिया था, जबकि चीन ने अमेरिकी उत्पादों पर इसे 10% कर दिया था. चीन ने दुर्लभ धातु (Rare Earth Magnets) के निर्यात को फिर शुरू किया था.

बाजारों को मिलेगी राहत, आगे की राह खुली

टैरिफ की समय सीमा बढ़ने से वैश्विक बाजारों में तनाव बढ़ने का तत्काल डर कम हो गया है. इससे पहले, इस साल की शुरुआत में, अमेरिका ने चीनी आयात पर टैरिफ को बढ़ाकर 145% कर दिया था, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण  दुर्लभ धातु के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था.

इस विस्तार से दोनों देशों को कई लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा. इन मुद्दों में फेंटानिल की तस्करी से जुड़े अमेरिकी टैरिफ और चीन द्वारा स्वीकृत रूसी और ईरानी तेल की खरीद पर चिंताएं शामिल हैं.

इस 90 दिनों की बढ़ोतरी से यह भी संभावना बन रही है कि ट्रंप अक्टूबर के अंत में चीन की यात्रा कर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर सकते हैं. यह यात्रा दक्षिण कोरिया में होने वाले एक अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है, जिसमें ट्रंप की भागीदारी तय है.

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AI चिप बिक्री पर अभी भी विवाद

हालांकि टैरिफ में यह बढ़ोतरी हुई है, लेकिन AI चिप्स की बिक्री पर मतभेद बने हुए हैं. ट्रंप ने हाल में कुछ एक्सपोर्ट कंट्रोल को ढीला किया था, जिसके बाद Nvidia और AMD ने कुछ चीनी AI चिप रेवेन्यू का 15% अमेरिकी सरकार को देने पर सहमति जताई है ताकि उन्हें निर्यात लाइसेंस मिल सके.

ट्रंप ने संकेत दिया कि Nvidia को अपना सबसे एडवांस AI चिप का थोड़ा बदला हुआ वर्ज़न चीन में बेचने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन जुलाई के अंत में चीनी रेगुलेटर्स ने Nvidia को H20 चिप्स में कथित सुरक्षा खामियों पर बातचीत के लिए तलब किया, जिससे टेक सेक्टर में अविश्वास कायम है.

यह विस्तार ट्रंप प्रशासन की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें कई देशों पर पारस्परिक टैरिफ और सेक्टर-विशिष्ट टैक्स लगाया जा रहा है. फिलहाल अमेरिकी टैरिफ में 20% चार्ज फेंटानिल तस्करी से जुड़ा है, जबकि 10% का बेसलाइन टैरिफ है, जो ट्रंप के पहले कार्यकाल से ही लागू है.

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