पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में एक बार फिर लोग सड़कों पर उतर आए हैं. ये लोग पाक सरकार और सेना की ज्यादतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. इस बार उनके तेवर और नारों में पहले से ज्यादा तीखापन नजर आ रहा है.

बता दें कि पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस (14 अगस्त) की पूर्व संध्या पर रावलाकोट के निवासियों ने सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को सीधे निशाना बनाते हुए नारे लगाए, जिसमें उन्हें अमेरिका की ‘कठपुतली’ तक कहा गया. सड़कों पर बस एक ही नारा ‘अमेरिका ने कुत्ते पाले, वर्दी वाले, वर्दी वाले’ गूंज रहा था.

लंबे समय से पनपता रोष

यह पहली बार नहीं है जब PoK के लोगों ने खुलेआम पाक सैन्य शासन का विरोध किया हो. हाल के वर्षों में कई कस्बों में सेना के सख्त रवैये के खिलाफ बार-बार प्रदर्शन देखे गए हैं. मुजफ्फराबाद और अन्य शहरों में कई बार गुस्साई भीड़ ने पाक सैनिकों और सुरक्षा कर्मियों को पीटा और उनका पीछा किया.

पिछले साल मई में मुजफ्फराबाद में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. वजह थी बढ़ते टैक्स, गेहूं के दामों में बेतहाशा इजाफा और आसमान छूते बिजली बिल. हालात इतने बिगड़े कि सुरक्षा बलों ने आंसू गैस चलाई और प्रदर्शनकारियों ने सैनिकों पर हमला कर दिया.

‘आजाद’ टैग के नीचे जिंदगी

पाकिस्तान जहां भारत पर जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाता है, वहीं PoK के लोग खुद इस्लामाबाद पर दमन और उपेक्षा का आरोप लगाते हैं. आधिकारिक तौर पर इसे ‘आज़ाद जम्मू-कश्मीर’ कहा जाता है, लेकिन यहां के लोग कहते हैं कि पाकिस्तान की पकड़ साल-दर-साल और कसती जा रही है. इसी वजह से यहां बार-बार जनविद्रोह देखने को मिल रहे हैं.

भारत के पक्ष में उठती आवाज़ें

ये प्रदर्शन भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हो रहे हैं. हाल के महीनों में PoK में भारत के प्रति खुला समर्थन करने वाली आवाजें उभरी हैं, हालांकि पाक सरकार ने उन्हें तेजी से कुचल दिया.

घरेलू संकट में ‘भारत-विरोधी’ पॉलिटिक्स

PoK में गुस्से के बीच पाकिस्तान की राजनीति और सेना भारत के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी में व्यस्त है. मंगलवार को पीएम शहबाज़ शरीफ ने दिल्ली को धमकी दी. इससे पहले जनरल असीम मुनीर ने भी इसी तरह की चेतावनी दी थी. लेकिन PoK के लोगों के लिए असली लड़ाई भारत से नहीं, बल्कि उन वर्दियों से है, जिनसे उन्हें आज़ादी के बजाय दमन मिला है.

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