भारतीयों ने 10 साल में इतनी रकम विदेशों में भेजी है, जितने में करीब 62 आईआईटी (IITs) बनकर खड़े हो जाएं. जी हां, इंडिया टुडे द्वारा दायर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शेयर किए गए आंकड़ों को देखें, तो बीते एक दशक में भारतीयों ने विदेशों में पढ़ रहे छात्रों की शिक्षा के लिए 1.76 लाख करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि विदेश भेजी है. केंद्रीय बैंक द्वारा बताया गया ये डेटा विदेशी शिक्षा पर भारत के खर्च के पैमाने को रेखांकित करता है और हायर स्टडी में घरेलू क्षमता और गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है.

एक दशक में इतनी बढ़ी सालाना निकासी
आरटीआई के जबाव में मिली जानकारी पर विस्तार से गौर करें, तो सिर्फ 2023-24 में भारतीयों ने विदेश में पढ़ने वाले छात्रों की शिक्षा के लिए 29,000 करोड़ रुपये विदेश भेजे, हालांकि ये आंकड़ा इससे पिछले साल भेजी गई रकम से थोड़ा कम रहा. जबकि, एक दशक पहले 2014 तक हायर एजुकेशन के लिए विदेश में पढ़ रहे छात्रों पर होने वाले खर्च का सालाना आंकड़ा महज 2,429 करोड़ रुपये था. वहीं वित्त वर्ष 2022-23 में हुई शिक्षा के लिए हुई निकासी 29,171 करोड़ तक पहुंच गई थी, जो पिछले एक दशक में 1200% की बढ़ोतरी दर्शाता है.

खर्च बढ़ा, विदेश जाने वालों की संख्या घटी
एक ओर जहां विदेश में पढ़ रहे छात्रों पर भारतीयों द्वारा खर्च की जा रही रकम बीते 10 सालों में साल-दर-साल बढ़ी है. तो वहीं बीते साल 2024 में भारत से पढ़ाई के लिए विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट देखने को मिली है और आंकड़ा 15% की गिरावट दर्शाता है. इसके पीछे की वजह पर गौर करें, तो दुनिया भर के देशों ने अपने वीजा नियमों (Visa Rules) को कड़ा किया है, जिससे ये गिरावट आई है.

मार्च 2025 में लोकसभा में सरकार द्वारा प्रश्न के दिए गए एक जवाब को देखें, तो इसमें ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (BoI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया था कि साल 2024 में 7,59,064 छात्र पढ़ाई के लिए विदेश गए, जो इससे पिछले साल 2023 के मुकाबले काफी कम कम था, जब 8,92,989 छात्र भारत से विदेश पहुंचे थे. हालांकि, इसेस पहले 2022 की बात करें, तो 7,50,365 छात्र विदेश गए थे. गौरतलब है कि BoI के आंकड़े उन यात्रियों को ट्रैक करते हैं, जिन्होंने अपनी यात्रा का उद्देश्य रिसर्च/शिक्षा घोषित किया. इसमें ये भी बताया गया कि 2024 में संख्या घटने के बावजूद ये आंकड़ा 2019 के कोरोना पूर्व के स्तर से काफी ऊपर रहा, जो 5,86,337 छात्र था.

कैसे इस खर्च से बन जाएंगे 62 IITs?
अब कैलकुलेशन के जरिए समझते हैं कि आखिर कैसे भारतीयों द्वारा शिक्षा पर खर्च के लिए विदेश भेजे गए इतने रुपयों में देश में 60 से ज्यादा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी आईआईटी जैसे संस्थान खड़े हो सकते हैं. तो 2014 की एक रिपोर्ट में एक IIT स्थापित करने के लिए कुल लागत 1,750 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जिसे महंगाई के समायोजन के बाद देखें तो 2025 में ये बढ़कर 2,823 करोड़ रुपये प्रति आईआईटी हो जाती है.

इस हिसाब से, पिछले दशक में विदेश भेजे गए 1.76 लाख करोड़ के हिसाब से कैलकुलेट करें, तो इतनी रकम से लगभग 62 IITs का वित्तपोषण किया जा सकता है. जितनी रकम अकेले बीते साल विदेश भेजी गई, उसने में ही 10 से ज्यादा आईआईटी स्थापित हो सकते हैं.

सरकार के शिक्षा बजट का तीन गुना खर्च
एक और आंकड़े पर गौर करें, तो 2025-26 में उच्च शिक्षा विभाग को केंद्र सरकार (Indian Govt) का आवंटन 50,077.95 करोड़ रुपये है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 46,482.35 करोड़ रुपये था. यानी सरकारी आवंटन में करीब 8 फीसदी की वृद्धि की गई है. फिर भी यह रकम भारतीयों द्वारा विदेश में शिक्षा पर किए जाने वाले खर्च से बहुत कम है.

वहीं पिछले दशक में विदेश भेजे गई 1.76 लाख करोड़ रुपये की राशि, सरकार के वित्त वर्ष 2025-26 के लिए उच्च शिक्षा बजट से तीन गुना अधिक है, जो 50,077.95 करोड़ रुपये है. इस बीच विदेशी शिक्षा से जुड़े लेनदेन की संख्या के बारे में पूछे जाने पर RBI की ओर से ये भी कहा गया है कि 2018-19 से पहले के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं.

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