GST : लाल किले से प्रधानमंत्री ने वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी में बदलाव लाने की जो घोषणा की है, वह बेहद महत्वपूर्ण है. इस सुधार को प्रधानमंत्री ने उचित ही ‘नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी’ बताया है. वर्ष 2017 में लागू की गयी वस्तु एवं कर सेवा को और सरल बनाने की इस प्रक्रिया के तहत जीएसटी के मौजूदा चार स्लैब में से 12 और 28 प्रतिशत वाले स्लैब हटा दिये जायेंगे तथा पांच व 18 फीसदी के दो ही स्लैब रहेंगे. इससे 12 फीसदी के दायरे में आने वाली मक्खन, फ्रूट जूस, ड्राई फ्रूट्स जैसी वस्तुएं पांच फीसदी के दायरे में आ जायेंगी, तो 28 फीसदी टैक्स के दायरे में आने वाली सीमेंट, एसी, फ्रिज, वाशिंग मशीन जैसी वस्तुएं 18 फीसदी के स्लैब में आ जायेंगी.

साबुन, तेल, रेडीमेड गारमेंट, जूते पर टैक्स मौजूदा 12 प्रतिशत से घटकर पांच फीसदी होने से भी आम लोगों को राहत मिलेगी. इससे छोटी कारें भी सस्ती हो सकती हैं. लोगों की मांग थी कि स्वास्थ्य बीमा पर लगने वाले 18 फीसदी टैक्स को कम करके पांच फीसदी किया जाये, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को राहत और बीमा उद्योग को बढ़ावा मिले. आगामी सितंबर में जीएसटी काउंसिल की बैठक में सरकार यह प्रस्तावित बदलाव कर सकती है. दो स्लैब हटाने से राजस्व में करीब 4,000 करोड़ के नुकसान का अनुमान है, लेकिन खपत बढ़ने से राजस्व में इस नुकसान की भरपाई हो सकती है.

हालांकि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि दो स्लैबों को हटाने से सरकार के राजस्व में अधिक फर्क नहीं पड़ने वाला, क्योंकि 65 फीसदी राजस्व 18 फीसदी के स्लैब से प्राप्त होता है, जबकि 12 फीसदी के जिस टैक्स स्लैब को हटाया जाना है, उससे राजस्व की प्राप्ति महज पांच फीसदी ही है. तथ्य यह है कि जीएसटी के जरिये कर संग्रह का लक्ष्य पूरा हो गया है और पिछले पांच साल में जीएसटी वसूली दोगुनी हो चुकी है. सरकार द्वारा टैक्स में कमी करने का यह भी एक कारण हो, तो आश्चर्य नहीं.

जीएसटी में इस सुधार से कर व्यवस्था सरल होगी, टैक्स दर में कमी आयेगी, कारोबारियों व उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. बताया यह भी जा रहा है कि धीरे-धीरे यह मॉडल 2047 तक एकल कर दर यानी सिंगल टैक्स स्लैब की ओर बढ़ेगा. तात्कालिक तौर पर इसे अमेरिकी टैरिफ से मुकाबले की तैयारी भी माना जा रहा है. यानी इससे टैरिफ के खतरों को कम करने में भी मदद मिलेगी.



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