बिहार में मुफ्त बिजली: बिहार में मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना के तहत हर घरेलू उपभोक्ता को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिल रही है. अगस्त में 60 लाख परिवारों का बिजली बिल शून्य आया. लेकिन राजधानी पटना से सटे मसौढ़ी प्रखंड का एक गांव ऐसा भी है, जहां इस योजना का लाभ तो दूर, पिछले एक महीने से अंधेरे ने डेरा डाल रखा है.
गांव में पसरा अंधेरा
मसौढ़ी प्रखंड के भैंसवां पंचायत के पकड़ी गांव (वार्ड नंबर 14) में पिछले एक महीने से ट्रांसफार्मर जल जाने के कारण बिजली गुल है. नतीजा—200 से ज्यादा घर अंधेरे में हैं, पानी की किल्लत ने लोगों को बेहाल कर दिया है, मोबाइल चार्जिंग तक ठप हो गई है.
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बिजली विभाग से शिकायत की गई, लेकिन पदाधिकारी कुंभकर्णी नींद में पड़े रहे.
सड़क पर उतरे लोग
रविवार को नाराज़ ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर घंटों विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर ट्रांसफार्मर तुरंत नहीं बदला गया तो हाईवे जाम कर बड़ा आंदोलन किया जाएगा.
ग्रामीण सविता देवी ने कहा, “एक महीने से पूरा गांव अंधेरे में है। पानी के लिए लोग तरस रहे हैं .पदाधिकारी सोए हुए हैं.”
स्थानीय राजेंद्र बिंद का कहना है, “बिजली विभाग की लापरवाही से गांव में त्राहिमाम मचा हुआ है.”

प्रशासन हरकत में
विरोध बढ़ता देख विद्युत कार्यपालक अभियंता पवन कुमार ने आश्वासन दिया कि शाम तक नया ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा. उन्होंने बताया कि पकड़ी गांव में लगे 65 केवी ट्रांसफार्मर से लगभग 40 उपभोक्ता रजिस्टर्ड हैं, जबकि 100 से ज्यादा घर उससे बिजली जलाते हैं.
यह घटना सरकार की उस महत्वाकांक्षी योजना पर सवाल खड़े करती है, जिसके लिए 2025-26 में 3797 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. योजना का दावा है कि राज्य के 90% उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिल रही है. लेकिन मसौढ़ी का पकड़ी गांव दिखा रहा है कि बिजली के बिना फ्री बिजली योजना का लाभ कैसा मिलता है.
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