राजधानी दिल्ली में दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 लागू कर दिया गया है. दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सोमवार को इसपर मुहर लगाई है, अब सरकार ने इसे अधिसूचित कर दिया है. इस कानून में निजी स्कूलों की फीस पर मनमानी रोकने के लिए अभिभावकों को वीटो अधिकार दिया गया है.

इस बिल के लागू होने के बाद अब प्राइवेट स्कूलों को फीस बढ़ाने से पहले औपचारिक अनुमति लेनी होगी. इसके अलावा जब स्कूल फीस में बढ़ोतरी करेगा तो फीस का पूरा ब्रेकअप बॉडी से शेयर किया जाएगा. इन नियमों का पालन न करने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है. कुछ स्थितियों में मान्यता भी रद्द की जा सकती है. इसके साथ ही एक ऐसा सिस्टम बनाया जाएगा, जहां पेरेंट्स अपनी शिकायत दर्ज कर सकेंगे. अगर स्कूल इन नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी.

लॉटरी सिस्टम से चुने जाएंगे 15% पेरेंट्स

इस बिल के तहत कई स्तरीय नियामक तंत्र बनाए जाएंगे. इसमें स्कूल प्रबंधन का एक प्रतिनिधि, प्रिंसिपल सचिव, पांच अभिभावक, तीन शिक्षक औऱ एक सरकारी पर्यवेक्षक शामिल होंगे. इसमें पेरेंट्स का चयन लॉटरी सिस्टम से होगा. 15 जुलाई को फीस तय की जाएगी, एक बार फीस तय होने के बाद इसे तीन साल तक बदला नहीं जा सकेगा. अगर 15 प्रतिशत अभिभावक शिकायत करते हैं तो उनकी शिकायतों पर सुनवाई होगी.

अगर स्कूल फीस बढ़ाते हैं तो उन्हें अपना फाइनेंशियल डेटा और स्कूल की सभी सुविधाओं की जानकारी देनी होगी. अगर बिल को ना मानते हुए स्कूल फीस बढ़ाते हैं तो एक लाख से 10 लाख तक का जुर्माना भरना पड़ेगा. अगर जुर्माना देने में देरी होती है तो वो बढ़ता जाएगा. अगर जुर्माना नहीं दिया तो मान्यता रद्द कर दी जाएगी. हालांकि, पेरेंट्स का मानना है कि 15 प्रतिशत पेरेंट्स का लॉटरी सिस्टम से चुनना भी गलत है.

बिल से क्यों खुश नहीं है कुछ पेरेंट्स?

प्राइवेट स्कूलों में फीस से जुड़े इस बिल को लेकर अभी भी कुछ मुद्दों पर पैरेंट्स खुश नजर नहीं आ रहे हैं. दिल्ली पैरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष अपराजिता गौतम का कहना है कि बिल कहता है कि प्रॉफिट और कमर्शियलाइजेशन को रोका जाएगा, लेकिन असल में यह उन्हें कानूनी जामा पहनाने का प्रयास है. उन्होंने बताया, ‘किसी स्कूल कमिटी के खिलाफ शिकायत तभी मानी जाएगी जब कम से कम 15% पेरेंट्स एक साथ बोलें. यानी, व्यक्तिगत पेरेंट्स कुछ नहीं कर सकते. सेक्शन 2(6) में स्कूल द्वारा डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रूप से ली गई फीस को वैध बताया गया है, जो गलत है.’

उन्होंने बताया, ‘नए नियमों के हिसाब से टर्म फीस 12 की जगह 13 महीनों की ली जाएगी. इसके अलावा प्ले स्कूलों को बिल से बाहर रखा गया, जबकि ये सबसे ज्यादा चार्ज करते हैं और अब तक किसी रडार में नहीं हैं. वही, कमेटी में 11 लोग होंगे, जिसमें अधिकांश मैनेजमेंट से जुड़े होंगे. फैसले पहले ऊपर (मैनेजमेंट कमिटी) में लिए जाएंगे. बिल के सेक्शन 17 में कहा गया है कि सिविल कोर्ट की जूरिस्डिक्शन नहीं होगी, यानी, पेरेंट्स कोर्ट भी नहीं जा सकते.’ साथ ही पैरेंट्स ने मांग की है कि इसमें कैंपिग की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि फीस की अधिकतम सीमा तय हो.

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