‘दुनिया बदल रही, कोई भी एकतरफा फैसला नहीं चलेगा…’, भारत आए चीनी विदेश मंत्री का ट्रंप को दो टूक मैसेज – Chinese FM Wang Yi meets s jaishankar in Delhi Says India China ties showing positive trend warns america ntcprk


भारत दौरे पर आए चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि भारत-चीन संबंध सहयोग की दिशा में सकारात्मक रुझान दिखा रहे हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं, बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए. सोमवार को नई दिल्ली पहुंचे वांग ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बैठक के दौरान यह टिप्पणी की. इस दौरान उन्होंने अमेरिका को भी निशाने पर लिया और कहा कि बदलती दुनिया में एकतरफा धमकियां और फैसले नहीं चलेंगे.

उनकी यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन दौरे से पहले हो रही है. बैठक में वांग ने विदेश मंत्री जयशंकर से कहा कि चीन-भारत संबंध सहयोग की ओर लौटने की दिशा में सकारात्मक रुझान दिखा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि इस साल चीन और भारत के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ है और अतीत से सबक सीखा जा सकता है. उनका यह बयान पूर्वी लद्दाख (गलवान घाटी में) में सैन्य गतिरोध के बाद चार साल से अधिक समय तक संबंधों में आई नरमी की ओर इशारा है.

चीनी विदेश मंत्री ने भारत-चीन संबंधों पर और क्या कहा?

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के लिए यह जरूरी है कि वे सही रणनीतिक धारणा रखें, एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी या खतरे के बजाय साझेदार और अवसर के रूप में देखें और अपने बहुमूल्य संसाधनों का निवेश विकास में करें.

उन्होंने कहा कि दोनों देशों को क्षेत्र के पड़ोसी देशों के बीच आपसी सम्मान और विश्वास के साथ सह-अस्तित्व, साझा विकास और सहयोग के लिए सही तरीके तलाशने चाहिए.

वांग ने कहा कि चीन सौहार्द, ईमानदारी, पारस्परिक लाभ और साथ मिलकर चलने के सिद्धांतों को कायम रखने, भारत समेत पड़ोसी देशों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण, सुरक्षित, समृद्ध, और मैत्रीपूर्ण दुनिया बनाने के लिए काम करने को तैयार है.

चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत-चीन को एक-दूसरे के प्रति आश्वस्त रहना चाहिए, एक ही दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, मुश्किलों को दूर करना चाहिए, सहयोग का विस्तार करना चाहिए और द्विपक्षीय संबंधों की गति को बढ़ाना चाहिए.

‘सहयोग से दो महान सभ्यताओं को फायदा होगा’

उन्होंने कहा कि इससे दो महान सभ्यताओं को लाभ होगा जिससे एशिया और पूरे विश्व को स्थिरता मिलेगी. रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री जयशंकर और वांग के बीच वार्ता के बाद दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों की गति बनाए रखने पर सहमत हुए.

वांग की भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच संबंध सुधार की कोशिश के रूप में जो देखा जा रहा है जो 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद गंभीर तनाव की स्थिति से गुजर रहा है.

चीनी विदेश मंत्री ने की अमेरिका की आलोचना

वांग ने अपने भारत दौरे में अमेरिका की आलोचना भी की है. अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया बदल रही है और इस बीच एकतरफा तरीके से धमकाने का ट्रेंड भी बढ़ता जा रहा है जो कि अब नहीं चलेगा.

उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि मानवता विश्व की भविष्य की दिशा तय करने के लिए अहम चौराहे पर पहुंच गई है.

वांग ने कहा कि 2.8 अरब से अधिक की संयुक्त जनसंख्या वाले दो सबसे बड़े विकासशील देशों के रूप में, चीन और भारत को वैश्विक जिम्मेदारी की भावना दिखानी चाहिए, बड़ी शक्तियों के रूप में काम करना चाहिए, एकता के जरिए शक्ति हासिल कर विकासशील देशों के लिए एक उदाहरण स्थापित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत और चीन को बहुध्रुवीय दुनिया में योगदान देना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लोकतंत्रीकरण को बढ़ावा देने में योगदान देना चाहिए.

सीमा विवाद मसले पर अजीत डोभाल से मुलाकात

उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अपने नेताओं की आम सहमति को जमीन पर उतारने की दिशा में काम कर रहे हैं और धीरे-धीरे वार्ता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. देश सीमा पर शांति बनाने पर काम कर रहे हैं और मिलकर भारतीय तीर्थयात्रियों को चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में पवित्र पर्वतों और झीलों की तीर्थयात्रा फिर से शुरू करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं.

चीनी विदेश मंत्री मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि (SR) वार्ता के के लिए भारत आए हैं. डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता सिस्टम के लिए विशेष प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं.

डोभाल ने पिछले साल दिसंबर में चीन की यात्रा की थी और वांग के साथ 23वें दौर की वार्ता की थी. इससे कुछ हफ्ते पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शि गिनपिंग ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के कजान शहर में मुलाकात की थी. दोनों नेताओं ने इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने पर जोर दिया था.

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