प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से अपने आवास पर मुलाकात की. इससे पहले, राजधानी में वांग यी के साथ कई उच्चस्तरीय वार्ताएं हुई थीं. इस दौरान नई दिल्ली और बीजिंग एशियाई दिग्गजों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं.

टॉप चीनी अधिकारी की प्रधानमंत्री के साथ बैठक से पहले दिन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सोमवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी उच्च स्तरीय वार्ता हुई थी.

वांग यी की भारत यात्रा शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा से कुछ दिन पहले हुई है. इसे इसलिए भी अमह माना जा रहा है क्योंकि यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को दोगुना करके 50 फीसदी कर दिए जाने के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ते तनाव के बीच हो रही है, जिसमें रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 25 फीसदी का अतिरिक्त जुर्माना भी शामिल है.

‘एलएसी पर कायम है शांति और सौहार्द…’

विशेष प्रतिनिधि (SR) मकैनिज्म के ढांचे के तहत हुई वार्ता के दौरान, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि पिछले नौ महीनों में भारत-चीन संबंधों में ‘उन्नति’ हुई है, क्योंकि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और सौहार्द कायम है, जो 2020 के गलवान घाटी संघर्ष से शुरू हुए गंभीर तनाव को दूर करने के लिए दोनों देशों द्वारा नए सिरे से किए जा रहे कोशिशों का प्रतीक है.

उन्होंने कहा, “सीमाएं शांत हैं, शांति और सौहार्द बना हुआ है और हमारे द्विपक्षीय संबंध और भी मज़बूत हुए हैं.”

डोभाल ने औपचारिक रूप से यह भी ऐलान किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन जाएंगे. उन्होंने कहा कि इस यात्रा के मद्देनजर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता ‘बहुत विशेष महत्व’ रखती है.

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चीन के विदेश मंत्री ने क्या कहा?

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अपने बयान में कहा, “दोनों पक्षों को स्ट्रैटेजिक बातचीत के जरिए आपसी यकीन बढ़ाना चाहिए और सहयोग के साथ साझा हितों का विस्तार करना चाहिए. इसके साथ ही बॉर्डर पर तमाम मुद्दों का समाधान करना चाहिए.” उन्होंने कहा कि सीमा पर अब जो स्थिरता बहाल हुई है, उसे देखकर हमें खुशी हो रही है.

उन्होंने आगे कहा, “अब, द्विपक्षीय संबंधों में सुधार और विकास का एक अच्छा मौका है. चीनी पक्ष एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री की चीन यात्रा को बहुत महत्व देता है.”

सोमवार को, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीन के विदेश मंत्री को बताया कि भारत-चीन संबंधों को आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हितों से निर्देशित होना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारे संबंधों में एक कठिन दौर देखने के बाद, अब हमारे दोनों राष्ट्र आगे बढ़ना चाहते हैं. इसके लिए दोनों पक्षों की तरफ से एक स्पष्ट और रचनात्मक नजरिए की जरूरत है. इस कोशिश में हमें तीन सिद्धांतों – पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और पारस्परिक हित द्वारा निर्देशित होना चाहिए. मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए, न ही प्रतिस्पर्धा संघर्ष.

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