पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिम मुनीर को भारत के साथ 4 दिन चले युद्ध के बाद फील्ड मार्शल का दर्जा मिला. वो यहीं नहीं रुके, सरकारों को गिराने और पर्दे के पीछे से चलाने वाली मशहूर संस्था के मुखिया के तौर पर मुनीर अब और ताकतवर हो गए हैं.  विदेश नीति में भी उनका दखल साफ दिख रहा है.

पाकिस्तानी सेना पर भारत से रिश्ते सुधारने की कोशिशों को पटरी से उतारने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं. अब इसे लेकर एक बड़ा संकेत तब दिखा, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुनीर को सिर्फ दो महीने के भीतर दो बार व्हाइट हाउस में वन-टू-वन मीटिंग के लिए बुलाया.

विदेश दौरे में अपने पीएम से आगे निकले मुनीर

इंडिया टुडे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम के मुताबिक, पहलगाम आतंकी हमले (अप्रैल) के बाद मुनीर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से ज्यादा विदेशी दौरे किए.  23 अप्रैल से 14 अगस्त के बीच मुनीर ने 9 बड़े कूटनीतिक दौरे किए, इसके मुकाबले पीएम शहबाज़ शरीफ सिर्फ 8 बार विदेश गए. खास बात यह कि भारत-पाक संघर्ष के बाद मुनीर, शरीफ के साथ कम से कम 4 बार विदेश गए, ताकि ‘दोस्त देशों’ को पाकिस्तान के पक्ष में खड़े रहने पर धन्यवाद दे सकें.

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मुनीर का बढ़ता कद

पाकिस्तानी सेना हमेशा से ताकतवर रही है, लेकिन इस बार कमजोर नागरिक सरकार, आर्थिक संकट और भारत से टकराव ने मुनीर की ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी एंटी-हिंदू बयानबाजी पहलगाम आतंकी हमले की वजह भी हो सकती है. 9 अगस्त को अमेरिका के दूसरे दौरे में, फील्ड मार्शल मुनीर ने वहां के टॉप मिलिट्री ऑफिसर, जनरल डैनियल केन से मुलाकात की. इसमें क्षेत्र में अमेरिका-पाकिस्तान की “सफल काउंटर टेररिज्म साझेदारी” पर चर्चा हुई।

यही नहीं 18 जून को 5 दिन के अमेरिकी दौरे में, मुनीर व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ लंच करने वाले पहले पाकिस्तानी आर्मी चीफ बने. इसके अलावा जुलाई के आखिर में मुनीर चीन भी गए और मई में तुर्किये, अजरबैजान, ईरान और ताजिकिस्तान का दौरा भी किया. यहां उन्होंने भारत के ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान का साथ देने वाले देशों का शुक्रिया अदा किया.

ट्रंप के साथ रिश्तों में नया मोड़

पहले कार्यकाल में ट्रंप पाकिस्तान को झूठ और धोखे का अड्डा कहते थे. अमेरिकी अधिकारियों ने खुलेआम पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था. लेकिन अब दूसरे कार्यकाल में, अमेरिकी सेना पाकिस्तान के साथ काउंटर टेररिज़्म साझेदारी को “बेहतरीन” बता रही है. यानी, अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्ते फिर से सुधरते दिख रहे हैं.

सेना का बढ़ता दबदबा

पहले पाकिस्तानी सेना सिर्फ पर्दे के पीछे से फैसले करती थी और पब्लिक में कम ही नजर आती थी. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद से हालात बदल गए.  युद्धविराम के कुछ ही दिनों बाद पीएम शरीफ की सरकार ने मुनीर को आर्मी चीफ से फील्ड मार्शल बना दिया. पाकिस्तान के इतिहास में यह सम्मान पाने वाले वे दूसरे आर्मी चीफ हैं.

पहला उदाहरण 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान अय्यूब खान थे. फिर 2008 के बाद पाकिस्तान में कई ताकतवर आर्मी चीफ आए, उनमें जनरल अशफाक परवेज कयानी, जनरल राहील शरीफ और जनरल कमर जावेद बाजवा जैसे नाम थे, लेकिन कोई भी अपनी पकड़ उतनी मजबूत नहीं बना सका, जितनी आज आसिम मुनीर ने बना ली है.

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