भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई, बारिश की मार से जूझ रही है. बीते तीन दिनों की लगातार बारिश से शहर की रफ्तार थम गई है. कहीं सड़कें डूबीं, तो कहीं लोकल ट्रेनें ठप हो गईं. स्कूल-कॉलेज बंद करने पड़े और झीलें-नदियां उफान पर हैं.

24 घंटे में 322 मिमी बारिश

भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, पश्चिमी उपनगरों के बोरीवली फायर स्टेशन पर 24 घंटे में सबसे ज्यादा 322 मिमी बारिश दर्ज की गई. चिंचोली में 294 मिमी और कांदिवली में 276 मिमी पानी बरसा. सेंट्रल और ईस्टर्न उपनगर भी पीछे नहीं रहे. विक्रोली में 232 मिमी, कुर्ला में 163 मिमी और मुलुंड में 94 मिमी बारिश दर्ज हुई.

दक्षिण मुंबई में बरसात तुलनात्मक रूप से कम रही. कोलाबा में 124 मिमी, मालाबार हिल में 97 मिमी और नरीमन प्वाइंट पर 117 मिमी बारिश दर्ज की गई. यह साफ करता है कि मुंबई के उपनगर हमेशा भारी बरसात की चपेट में ज्यादा रहते हैं.

लोकल ठप, लोग बेघर

मंगलवार को शहर के करीब 80 स्टेशनों के औसत आंकड़े बताते हैं कि कई इलाकों में बारिश 200 मिमी से ऊपर रही. नतीजा ये हुआ कि ड्रेनेज सिस्टम ओवरफ्लो हो गया और रेलवे ट्रैक डूब गए. मिटी नदी का जलस्तर 3.9 मीटर तक पहुंच गया, जिसके चलते कुर्ला इलाके से 350 लोगों को सुरक्षित निकाला गया. यही नहीं  हार्बर और मेन लाइन पर लोकल ट्रेन सेवाएं रोकनी पड़ीं.

हालात बिगड़ते देख बीएमसी ने रेड अलर्ट जारी कर दिया और मुंबई के साथ ठाणे, पालघर और रायगढ़ में भी सरकारी दफ्तर, स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए.

25 साल का ट्रेंड: कभी सूखा, कभी बाढ़

सांताक्रूज़ वेदर स्टेशन (मुंबई का सेंट्रल IMD स्टेशन) के आंकड़े बताते हैं कि अगस्त की बरसात पिछले 25 सालों में काफी बदली है.

2005: बाढ़ वाला साल, अगस्त में 527 मिमी बारिश
2020: रिकॉर्ड 1240 मिमी – तीन गुना ज्यादा
2021: 338 मिमी
2022: 552 मिमी
2023: 177 मिमी
2025 (अब तक): 792 मिमी (अभी दो हफ्ते बाकी हैं)

मुंबई का सबसे भयानक दिन 27 जुलाई 2005 रहा, जब सिर्फ 24 घंटे में 944.2 मिमी बारिश ने पूरे शहर को पंगु कर दिया था.

अगस्त की बरसात: कभी 22 मिमी, कभी 331 मिमी

पिछले दशक में अगस्त की बरसात बेहद अनिश्चित रही है.
6 अगस्त 2015: सिर्फ 22.3 मिमी
अगस्त 2017: 331.4 एमएमजी
4 अगस्त 2019: 216.4 मिमी।
अगस्त 2020: 268.6 मिमी।

ये दिखाता है कि मॉनसून का मिज़ाज कितना बदलता जा रहा है.

क्यों बरस रही इतनी बारिश?

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, महाराष्ट्र के तट पर बना ऑफशोर चैनल और अरब सागर से खिंची नमी मुंबई की तरफ लगातार आ रही है. इसके ऊपर से मध्य भारत में बना लो-प्रेशर ज़ोन इस नमी को पश्चिम की ओर धकेल रहा है. यही वजह है कि मुंबई लगातार भारी बारिश झेल रही है.

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