दरभंगा एयरपोर्ट पर आइएलएस हुआ ऑन, अब 1100 मीटर रनवे विजिबिलिटी पर भी उतरेगा विमान


Darbhanga Airport: अजय कुमार मिश्रा, दरभंगा. दरभंगा हवाई अड्डे पर अब रनवे पर 1400 मीटर की जगह 1100 मीटर विजिबिलिटी हो गयी है. ऐसे में विमान आसानी से लैंड कर सकेंगे. आइएलएस सिस्टम से प्राप्त सिगनल के आधार पर विमान को रनवे पर सही जगह व सुरक्षित उतारने की सुविधा मिलती है. एयरपोर्ट पर विमान को सुरक्षित, सटीक और कम दृश्यता में भी रनवे पर उतरने में आइएलएस सिस्टम गाइड का काम करता है. हर साल ठंड के मौसम में घने कोहरे के दौरान दरभंगा एयरपोर्ट से उड़ान सेवाएं बाधित होती रही है. लेकिन, अब आइएलएस सुविधा बहाल हो जाने से यह समस्या अब काफी हद तक कम हो जायेगी.

लैंडिंग एवं टेक ऑफ में मिलेगी अधिक सुविधा

जानकारी के अनुसार जब विमान उतर रहा होता है, तब पायलट को रन-वे की दिशा और सही कोण से नीचे उतरना होता है. रन-वे से आइएलएस सिस्टम पायलट को रेडियो सिग्नल भेजता है. इससे पायलट को यह जानकारी मिलती है कि विमान सही लाइन और सही एंगल पर है या नहीं. इसके अलावा यह रन-वे के सेंटर लाइन (बीच की रेखा) की सटीक जानकारी देता है. इससे पायलट समझ जाता है कि विमान, रन-वे से बाएं है या दाएं. वहीं विमान के मानक से ज्यादा ऊंचाई पर या ज्यादा नीचे होने पर पायलट को ग्लाइड स्लोप सिग्नल चेतावनी देता है. सिस्टम से मिलने वाले सिग्नल की मदद से विमान को ठीक कर सुरक्षित लैंड कराया जाता है.

कैट टू लाइट का काम अंतिम चरण में

जानकारी के अनुसार रन-वे पर कैट- टू- लाइट लगाने का काम अंतिम चरण में है. इसमें करीब दो से तीन माह का समय और लगने की संभावना जतायी गयी है. काम पूरा हाेने पर इस सेवा के शुरू हो जाने से विमानों की सुरक्षित लैंडिंग क्षमता और अधिक बढ़ जायेगी. कैट- टू- लाइट के फंक्शनल हो जाने पर विजिबिलिटी 300 से 400 मीटर हो जायेगी. इससे घने कोहरे में भी विमान आसानी से लैंड एवं टेक ऑफ कर सकेंगे.

अब बिना बाधा कर सकेंगे यात्रा

दिल्ली जाने वाले यात्री विवेक मिश्रा ने बताया कि सर्दियों में अक्सर फ्लाइट रद्द हो जाती थी. लेकिन, अब आइएलएस ऑन होने से बिना बाधा यात्रा करने की उम्मीद बढ़ गयी है. मुंबई जा रहे संतोष साह का कहना था कि नयी व्यवस्था के चालू हो जाने से अब जाड़ा में विमानों का आवागमन बाधित नहीं होगा. एयरपोर्ट निदेशक नावेद नजीम ने कहा, “हवाई अड्डा पर आइएलएस सिस्टम काम करने लगा है. इससे विमानों का परिचालन और अधिक सुरक्षित हो गया है. विजिबिलिटी 1400 से घटकर 1100 हो गयी है. इससे ठंड के मौसम में फ्लाइट रद्द होने की संभावना कम हो जायेगी. कैट- टू- लाइट का काम भी दो से तीन माह में पूरा कर लिया जायेगा.”

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