संसद के चालू मॉनसून सत्र के दौरान वोटर लिस्ट रिवीजन के मुद्दे पर गतिरोध जारी रहा. सत्र अंतिम दिन भी लोकसभा की कार्यवाही हंगामे के कारण नहीं चल सकी. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही हंगामे के कारण पहले 12 बजे तक, फिर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी.
स्पीकर ने अनिश्चितकाल के लिए कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा से पहले इस सत्र के दौरान हुए कामकाज की जानकारी भी सदन में दी. लोकसभा स्पीकर ने कहा कि इस सत्र में कुल मिलाकर 14 सरकारी विधेयक सदन में पेश किए गए. इनमें से 12 विधेयक पारित भी किए गए.
उन्होंने कहा कि 28 और 29 जुलाई को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा हुई, जिसका समापन प्रधानमंत्री के जवाब के साथ हुआ. स्पीकर ने कहा कि 18 अगस्त 2025 को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों पर विशेष चर्चा प्रारंभ की गई. उन्होंने कहा कि इस सत्र के दौरान मौखिक उत्तर के लिए 419 तारांकित प्रश्न शामिल किए गए थे. लेकिन केवल 55 प्रश्नों के ही मौखिक उत्तर दिए जा सके.
स्पीकर ने कहा कि सत्र की शुरुआत में सभी ने तय किया था कि सदन में 120 घंटे चर्चा करेंगे. बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में भी इस पर सहमति बनी थी. लेकिन नियोजित व्यवधान और लगातार गतिरोध के कारण हम केवल 37 घंटे ही चर्चा कर पाए. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में हम सभी के आचरण को, कार्यप्रणाली को पूरा देश देखता है.
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स्पीकर ने कहा कि जनता बहुत उम्मीदों के साथ हमें चुनकर भेजती है, ताकि हम व्यापक और मर्यादित चर्चा कर सकें. उन्होंने कहा कि कुछ दिनों से देख रहा हूं मर्यादा के अनुरूप चर्चा नहीं हो रही है. स्पीकर ने कहा कि सदन के अंदर, संसद परिसर में जिस तरीके की नारेबाजी हो रही है. सदस्य जिस तरीके से तख्तियां लेकर आ रहे हैं, नियोजित गतिरोध किया जा रहा है, यह संसद की परंपरा नहीं रही है.
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उन्होंने ने कहा कि इस सत्र में जैसा आचरण किया गया, जिस तरह की भाषा का उपयोग किया गया, जिस तरीके की नारेबाजी की गई, ये मर्यादा के अनुरूप नहीं है. स्पीकर ने कहा कि हमारी कोशिश होनी चाहिए कि गरिमापूर्ण चर्चा हो. नियोजित गतिरोध, नारेबाजी करना, आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि इससे बचने का प्रयास करना चाहिए.
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ओम बिरला ने ने कहा कि संसद के अंदर और परिसर में भी हमारी भाषा मर्यादित होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सहमति और असहमति लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है. हर सदस्य को पर्याप्त समय, पर्याप्त अवसर दिया है. हमें प्रयास करना चाहिए कि संसद में अच्छी परिपाटी लागू करें. सभी राजनीतिक दलों को इस पर मंथन करना चाहिए. इस दौरान पीएम मोदी भी सदन में मौजूद थे.
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