सर्वश्रेष्ठ कप्तान और गेंदबाजों पर राहुल द्रविड़ का सामना करना पड़ा: ‘द वाल’ के नाम से प्रसिद्ध राहुल द्रविड़ भारत के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक रहे. 164 टेस्ट मैचों में शिरकत करने वाले द्रविड़ 13288 रनों के साथ दुनिया के पांचवें सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. भारत की बल्लेबाजी रीढ़ कहे जाने वाले द्रविड़ कर्नाटक से घरेलू क्रिकेट खेलते हुए आगे बढ़े, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता पाई और अपनी पारंपरिक तकनीक के दम पर विपक्षी गेंदबाज़ों के लिए लगातार चुनौती बने रहे. भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज़ और हेड कोच राहुल द्रविड़ ने अपने करियर में खेले गए कप्तानों में से सर्वश्रेष्ठ को चुना और साथ ही अलग-अलग कप्तानों के योगदान का भी जिक्र किया. पुराने दिनों को याद करते हुए, उन्होंने किस गेंदबाज को खेलने में सबसे ज्यादा दिक्कत आती थी, इसका भी उन्होंने जिक्र किया.
द्रविड़ ने रविचंद्रन अश्विन (R Ashwin) के यूट्यूब चैनल “कुट्टी स्टोरीज विद ऐश” शो में कहा, “मुझे वीबी चंद्रशेखर के नेतृत्व में क्रिकेट खेलकर बहुत मजा आया. तब मैं अपने करियर के शुरुआती दौर में था. तमिलनाडु में लीग क्रिकेट में उनके साथ खेलते हुए मैंने बहुत कुछ सीखा. मुझे उनका अंदाज पसंद आया. उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता और जीत की भूख. वीबी उन शुरुआती कप्तानों में से थे, जिनके साथ खेलने का मुझे आनंद आया.”
उन्होंने अलग-अलग कप्तानों के अधीन खेला और खुद भी कप्तान रहे, लेकिन वक्कड़ई बिक्शेशन चंद्रशेखर वह शख्स रहे जिन्होंने अपनी जुझारू प्रवृत्ति और जीत की चाहत से उन पर गहरा असर छोड़ा. चंद्रशेखर, जो कि कृष्णमाचारी श्रीकांत की तरह ही बेखौफ बल्लेबाजी कर सकते थे, घरेलू क्रिकेट में बड़ा नाम रहे और भारत के लिए सात वनडे मैच खेले.
इन कप्तानों ने किया सबसे ज्यादा प्रभावित
द्रविड़ ने आगे बताया कि कैसे एमएस धोनी (MS Dhoni), अनिल कुंबले (Anil Kumble) और सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) जैसे कप्तानों ने भी अपनी-अपनी तरह से गहरा प्रभाव छोड़ा. उन्होंने कहा, “मुझे लगा धोनी बहुत अच्छे थे. खासकर करियर के अंतिम दौर में उन्होंने जिस तरह टीम को मैनेज किया, वह आसान नहीं था. एक युवा खिलाड़ी से इतने बड़े नामों वाली टीम की कप्तानी करना आसान नहीं था.” द्रविड़ ने आगे कहा, “सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को अपनी तरह से बहुत कुछ दिया. वह जीत को लेकर हमेशा स्पष्ट थे. अनिल कुंबले भी काफी अच्छे थे, उनकी संवाद शैली बहुत स्पष्ट थी.”
मुरलीधरन और मैक्ग्रा ने किया सबसे ज्यादा परेशान
52 वर्षीय द्रविड़ ने बातचीत में यह भी बताया कि किन गेंदबाजों ने उन्हें सबसे अधिक चुनौती दी. ‘सुल्तान ऑफ स्विंग’ वसीम अकरम की काबिलियत को स्वीकारते हुए द्रविड़ ने कहा कि उन्होंने उन्हें उनके करियर के अंतिम पड़ाव में खेला. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के ग्लेन मैक्ग्रा, उनके लिए सबसे कठिन साबित हुए. द्रविड़ के पास डिफेंस की कमाल की तकनीक थी, और उन्होंने करियर के शिखर पर ग्लेन मैक्ग्रा का उसी से सामना किया. वहीं स्पिनरों में श्रीलंका के माहिर मुथैया मुरलीधरन सबसे चुनौतीपूर्ण रहे.
द्रविड़ ने कहा, “तेज गेंदबाज के तौर पर ग्लेन मैक्ग्रा. मैंने वसीम और वकार को उनके करियर के अंतिम दौर में खेला. जिन्होंने उन्हें शुरुआती दौर में खेला, वे कहते थे कि वसीम अलग ही स्तर के थे, और मैं यह कल्पना कर सकता हूँ. लेकिन मैंने उन्हें बैकएंड पर खेला, फिर भी वे बेहद शानदार थे. लेकिन मैंने मैक्ग्रा का सामना उनके चरम पर किया. वे एक असाधारण गेंदबाज़ थे. उन्होंने मुझे ऑफ़-स्टंप पर जितनी चुनौती दी, उतनी किसी ने नहीं दी.”
द्रविड़ ने कहा, “स्पिनरों में, मुरलीधरन सबसे बेहतरीन गेंदबाज़ थे, जिनके ख़िलाफ़ मैंने खेला. महान कौशल, दोनों तरह से गेंद को स्पिन करने की क्षमता. वे कभी थकते नहीं थे, लंबे स्पेल डालते रहते और लगातार दबाव बनाए रखते. वे वास्तव में अद्भुत थे.”
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