लेटरल एंट्री में आरक्षण मिलेगा या नहीं? केंद्र सरकार ने राज्यसभा में किया स्पष्ट


पार्श्व प्रविष्टि: लेटरल एंट्री यानी सीधी भर्ती की नियुक्तियों पर आरक्षण की सुविधा मिलेगा या नहीं? केंद्र सरकार ने इस पर एक अहम टिप्पणी की है. गुरुवार को राज्यसभा में केंद्रीय कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह ने  स्पष्ट कहा कि लैटरल एंट्री के तहत की जाने वाली विशेष नियुक्तियों पर आरक्षण की सुविधा नहीं लागू होती है.

3 साल में इतनी हुई नियुक्तियां

दरअसल, निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की सरकारी विभागों में सीधी नियुक्ति को लेटरल एंट्री कहा जाता है. सरकार के इस कथन से यह स्पष्ट हो गया है कि सीधी भर्ती की नियुक्तियों पर आरक्षण की सुविधा नहीं मिलेगी. राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि अभी तक 3 बार (2018, 2021 और 2023) सरकारी विभागों में सीधी भर्ती के जरिए कुल 63 लोगों की नियुक्ति की गई है.

आरक्षण न लागू होने की वजह

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लिखित उत्तर में बताया कि सीधी भर्ती के जरिए नियुक्ति किसी खास कामों के लिए होती है, जिसमें संयुक्त सचिव, उप सचिव और निदेशक पद शामिल होते हैं. उन्होंने कारणों को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह नियुक्ति सिर्फ 1 पदों के लिए होती है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के PGIMER, चंडीगढ़ बनाम फैकल्टी एसोसिएशन एवं अन्य मामले के फैसले के तहत आरक्षण नहीं लागू होता है.

पिछले साल हुआ था विवाद

सीधी भर्ती को लेकर अक्सर विवाद होता रहता है. पिछले साल 2024 में UPSC ने 45 पदों पर लेटरल एंट्री के तहत भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया था. इन पदों पर SC,ST और OBC के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं था, जिसकी वजह से विवाद खड़ा हो गया है. हालांकि, मुद्दा गरमाता हुआ देखकर UPSC ने भर्ती को वापस ले लिया.

UPSC के जरिए होती है नियुक्तियां

आपको बता दें सीधी भर्ती के तहत नियुक्तियां UPSC की जरिए किया जाता है. इसके तहत सरकार अपनी जरूरत के मुताबिक, पदों पर लैटरल एंट्री के जरिए विशेषज्ञों की नियुक्ति करता है. इनकी नियुक्ति खास कामों के लिए की जाती है. इन भर्तियों के तहत नियुक्त अधिकारी सीधे संयुक्त सचिव, उप सचिव और निदेशक बनते हैं. इनके पास संबंधित कामों की विशेषज्ञता रहती है.



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