विम्बलडन चैम्पियन रह चुकीं टेनिस स्टार पेट्रा क्वितोवा ने अपने जीवन का वह खौफनाक राज खोला है, जिसने उनके करियर के साथ-साथ उनकी पूरी जिंदगी हिला दी थी. चेक गणराज्य की यह टेनिस क्वीन, जिसकी मुस्कान कभी कोर्ट पर सूरज की किरणों-सी खिलती थी, आज भी उस चाकू से हमले की याद से कांप उठती है. रातों की नींद छीन लेने वाले डरावने सपने, पसीने से भीगे बुरे सपने और बेमायने लगने वाले फ्लैशबैक- यही उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गए थे.

लेकिन इसी दर्द ने उन्हें और भी खूबसूरत और मजबूत बना दिया…

सुनहरी शुरुआत से काली रात तक

2011 में विम्बलडन जीतकर क्वितोवा ने इतिहास रच दिया था. 1990 के दशक में जन्म लेने वाली वह पहली खिलाड़ी बनीं, जिसने ग्रैंड स्लैम अपने नाम किया. उस जीत के बाद उनकी शख्सियत में एक चमक आ गई थी. नर्म त्वचा, लहराते सुनहरे बाल, और रैकेट थामे हुई उस खूबसूरत खिलाड़ी की अदाएं दुनिया को दीवाना बना रही थीं.

पेट्रा-क्वितोवा
…टेनिस कोर्ट पर पेट्रा की अदाओं के क्या कहने! (Getty)

… लेकिन किस्मत ने अचानक करवट बदली.

दिसंबर 2016 में 26 साल की उम्र में वह अपने ही घर में एक दरिंदे का शिकार हुईं. गैस बॉयलर देखने का बहाना बनाकर आया हमलावर ने उन्हें पीछे से दबोच लिया और तेज धार वाला चाकू उनकी गर्दन पर रख दिया.

खुद को छुड़ाने की कोशिश में पेट्रा की नाजुक हथेली लहूलुहान हो गई. खून से भीगी उंगलियों को देख वह समझ चुकी थीं कि शायद टेनिस कोर्ट पर उनकी मोहक झलक अब कभी देखने को न मिले.

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23 दिसंबर, 2016: हमले के बाद जब मीडिया के सामने आईं. (Getty)

मौत से टकराकर लौटी ‘गॉर्जियस फाइटर’

डॉक्टरों ने साफ कह दिया- पेशेवर टेनिस में वापसी की संभावना सिर्फ 10 प्रतिशत है. लेकिन पेट्रा ने हार नहीं मानी.सर्जरी, दर्द और अनगिनत रातों की रोती आंखों से गुजरने के बाद उन्होंने सिर्फ 6 महीने में वापसी की. और फिर, जिस तरह वह कोर्ट पर उभरीं- नए आत्मविश्वास और तपती जुनून के साथ- उसे उनके फैन्स ने उनकी ‘दूसरी जिंदगी’ कहा.

वह अपने करियर के दौरान वर्ल्ड नंबर 2 तक पहुंचीं… लेकिन भीतर का दर्द, डर और टूटी नींदों का बोझ उनकी चमकती आंखों में अब भी झलक जाता था.

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पेट्रा क्विटोवा – आखिरी बार US Open में खेलने उतरेंगी. (Getty)

आज 35 साल की यह टेनिस क्वीन अपना आखिरी टूर्नामेंट US Open खेलने न्यूयॉर्क पहुंच चुकी हैं. चेहरे पर वही मासूम मुस्कान है, मगर आंखों में अब एक सुकून भी है.

पेट्रा ने ‘द गार्जियन’ से कहा, ‘मैंने कोर्ट पर रोया, मैं डर से कांपी, लेकिन मैं लड़ी भी… और शायद यहीं मेरी सबसे बड़ी जीत है. अब वह थक चुकी हैं- लंबी प्रैक्टिस, इंतजार, मैच से पहले का तनाव… और सबसे बढ़कर- माँ बनने की जिम्मेदारी.’

पिछले साल जुलाई में उन्होंने अपने टेनिस कोच पति के साथ बेटे ‘पेट्र’ का स्वागत किया. पेट्रा जब आखिरी बार कोर्ट पर उतरेगीं तो शायद यह सिर्फ एक खिलाड़ी की विदाई नहीं होगी- यह उस औरत की कहानी होगी, जिसने खूबसूरती और जज्बे से दुनिया को जीत लिया.

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