दिल्ली पुलिस की कमान अब नए आईपीएस अधिकारी के हाथों में आ गई है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी सतीश गोलचा को दिल्ली पुलिस का 26वां कमिश्नर नियुक्त किया है. वो इससे पहले तिहाड़ जेल के महानिदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उन्होंने आईपीएस अफसर एसबीके सिंह की जगह ली है, जिन्हें 31 जुलाई को संजय अरोड़ा के रिटायर होने के बाद कार्यवाहक पुलिस कमिश्नर बनाया गया था.

सूत्रों के मुताबिक, पिछले 20 दिनों में दिल्ली में अपराध दर में तेजी से बढोतरी ने केंद्र सरकार को चिंता में डाल दिया था. हालात उस वक्त और गंभीर हो गए, जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर उनके दफ्तर में जनसुनवाई के दौरान हमला हुआ. इस घटना के 24 घंटे के भीतर ही गृह मंत्रालय ने नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त करने का फैसला लिया. माना जा रहा है कि सीएम की सुरक्षा में हुई चूक सरकार की नाराजगी का बड़ा कारण बनी.

आईपीएस सतीश दिल्ली पुलिस में कई अहम पदों पर रह चुके हैं. वे डीसीपी, ज्वाइंट सीपी, स्पेशल सीपी और स्पेशल सीपी (इंटेलिजेंस) जैसे पदों पर तैनात रह चुके हैं. साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान वे स्पेशल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) के तौर पर पूरी मजबूती के साथ डटे रहे. दिल्ली से बाहर भी उनका अनुभव खासा व्यापक रहा है. फरवरी 2022 से जून 2023 तक वो अरुणाचल प्रदेश के डीजीपी के पद पर थे.

हाई-प्रोफाइल केसों से जुड़ा है नाम

आईपीएस सतीश गोलचा का नाम कई चर्चित और बड़े मामलों से जुड़ा रहा है. दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच और सीबीआई में रहते हुए उन्होंने कई बड़े केसों की कमान संभाली थी. उन्हें एक सख्त और रणनीतिक अफसर के रूप में जाना जाता है. सीबीआई में रहते हुए उन्होंने रुचिका छेड़छाड़ केस, रिजवानुर रहमान मौत मामला और 1984 सिख विरोधी दंगों की जांच जैसे संवेदनशील मामलों पर विस्तृत काम किया था.

सामने लाए शोपियां केस का सच

साल 2009 में कश्मीर के शोपियां जिले में दो लड़कियों की मौत के बाद यह आरोप लगा कि उनकी रेप कर हत्या कर दी गई. इस मामले ने पूरे राज्य को हिला दिया और विरोध प्रदर्शनों के चलते जांच सीबीआई को सौंपी गई. उस समय सतीश गोलचा और उनकी टीम ने इस केस की गहन जांच की और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की साजिश का पर्दाफाश किया. उनकी जांच ने साबित कर दिया कि केस फर्जी है.

आखिर क्यों हटे एसबीके सिंह?

साल 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी एसबीके सिंह ने 1 अगस्त को दिल्ली पुलिस कमिश्नर का चार्ज संभाला था. लेकिन उनका कार्यकाल शायद दिल्ली पुलिस इतिहास का सबसे छोटा रहा. सिर्फ 21 दिनों के भीतर ही उन्हें पद से हटाकर नया चेहरा सामने लाना पड़ा. दरअसल, इस दौरान दिल्ली में कई गंभीर घटनाएं हुईं. इनमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमला और 4 अगस्त को चाणक्यपुरी में सांसद की चेन स्नैचिंग शामिल थीं.

आगे उम्मीदें और चुनौतियां क्या

इन घटनाओं ने सरकार की चिंता बढ़ा दी और पुलिस कमिश्नर पर तत्काल फैसला लिया गया. सतीश गोलचा के पास 36 वर्षों का लंबा अनुभव है. उन्होंने उपहार अग्निकांड और पोंटी चड्ढा हत्याकांड जैसे चर्चित मामलों में भी अहम भूमिका निभाई. पूर्वोत्तर के दो राज्यों मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में पुलिस बल का नेतृत्व किया है. तिहाड़ जेल के डीजी के तौर पर भी उनकी पहचान एक कड़े और अनुशासित अफसर की रही है.

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