उत्तर प्रदेश के लखनऊ में डेटिंग ऐप के नाम पर चल रहा लूट का काला कारोबार अब पुलिस की गिरफ्त में है. ग्राइंडर ऐप के जरिए दोस्ती, फिर मुलाकात का झांसा और उसके बाद बंधक बनाकर लूट करने वाले खौफनाक मॉड्यूल का खुलासा हुआ है. पुलिस ने 16 मार्च को 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है. गिरफ्तार आरोपियों में इंदिरा नगर निवासी खालिद अहमद, गाजीपुर के देवकरण सिंह, अलीगंज के आकाश पांडे, सर्वोदय नगर के सुभाष रावत समेत एक नाबालिग शामिल है. अलीगंज थाने में दर्ज दो मुकदमों ने इस पूरे गिरोह की परतें खोल दी हैं.

ग्राइंडर ऐप पर फंसाया

पहला मामला गाजीपुर थाना क्षेत्र के 50 साल के अविवाहित टीचर का है, जो घर में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते हैं और पिता की मौत के बाद अकेले रह रहे थे. अकेलेपन का फायदा उठाकर आरोपियों ने उन्हें ग्राइंडर ऐप पर फंसाया. कई दिनों की चैटिंग के बाद एक युवक उनके घर पहुंचा, बातचीत के दौरान उसने अपने साथी को बुला लिया. इसके बाद दोनों ने टीचर की आंखों पर पट्टी बांधी, मुंह और हाथ बांध दिए और बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी. घर में रखे जेवर और रुपयों के बारे में पूछताछ की गई, जवाब न मिलने पर अलमारी की चाबी छीन ली गई. बदमाश करीब 3 लाख रुपए नकद, पर्स और सोने की चेन लूटकर फरार हो गए. जाते-जाते मोबाइल की टॉर्च जलाकर चेहरे पर वार करना इस गिरोह की हैवानियत का सबसे डरावना चेहरा बनकर सामने आया.

डेकोरेशन के बहाने किया कॉल

दूसरी वारदात 25 फरवरी 2026 की है, जहां निशातगंज न्यू हैदराबाद स्थित कालाकांकर कॉलोनी के एक इवेंट ऑर्गेनाइजर को इसी ऐप के जरिए निशाना बनाया गया. आरोपी ने डेकोरेशन के काम के बहाने कॉल किया और हजरतगंज बोट क्लब के पास मिलने बुलाया. वहां से बातचीत के बहाने उसे गोमती किनारे ले जाया गया, जहां पहले से मौजूद साथियों के साथ मिलकर उसे बंधक बना लिया गया. उसके पास रखी सोने की चेन, पर्स, कैश लूट लिया गया और UPI के जरिए भी रकम ट्रांसफर कराई गई. पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कबूला है कि वे इसी तरह कई लोगों को शिकार बना चुके हैं, यानी ये सिर्फ लूट नहीं, भरोसे की आड़ में बिछाया गया सुनियोजित डिजिटल शिकंजा है.

अपराधियों के लिए नया शिकारघर बने डेटिंग ऐप

पुलिस जांच में सामने आया है कि लखनऊ ही नहीं, आसपास के कई जिलों में ऐसे एक से ज्यादा गैंग सक्रिय हैं, जो लोकेशन बेस्ड डेटिंग ऐप्स के जरिए लोगों को जाल में फंसा रहे हैं. दावा है कि विदेशों तक इस तरह के मामले सामने आए हैं और आरोपी ऑस्ट्रेलिया तक ठगी के पैटर्न से वाकिफ हैं. ग्राइंडर जैसे ऐप, जो दुनिया के करीब 190 देशों में चलते हैं और करोड़ों यूजर्स रखते हैं, अब अपराधियों के लिए नया शिकारघर बनते जा रहे हैं. पुलिस अब आरोपियों की निशानदेही पर पुराने पीड़ितों तक पहुंच रही है, ताकि और मुकदमे दर्ज कर इस नेटवर्क की पूरी चेन तोड़ी जा सके.

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