एक हफ्ते में 3 करोड़ बैरल! US-ईरान जंग के बीच धड़ल्ले से रूसी तेल खरीद रहा भारत – America Israel Iran War India Buys Russian Oil Tanker China Strait Of Hormuz mnrd


अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग का असर अब सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका सीधा असर दुनिया के तेल बाजार पर भी दिखने लगा है. खासकर होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते खतरे के कारण तेल सप्लाई बाधित हो रही है. ऐसे में भारत ने एक बड़ा कदम उठाते हुए रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है. आंकड़ों से पता चलता है कि भारत ने सिर्फ एक हफ्ते में ही 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदा है.

स्थिति इतनी तेजी से बदली है कि जो टैंकर पहले चीन की ओर जा रहे थे, वे अब बीच रास्ते से ही मुड़कर भारत का रुख कर रहे हैं. यह बदलाव बताता है कि वैश्विक तेल व्यापार में भारत किस तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है.

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, “एक्वा टाटेन” नाम का एक टैंकर, जो पहले चीन के रिझाओ पोर्ट की ओर जा रहा था, उसने साउथ चाइना सी में अपना रास्ता बदल लिया और अब वह भारत के न्यू मैंगलोर पोर्ट की ओर बढ़ रहा है. इस टैंकर में रूस का उड़ाल्स क्रूड है, जिसे जनवरी के अंत में बाल्टिक सागर के एक बंदरगाह से लोड किया गया था.

7 टैंकर ने बदले रास्ते, अब आ रहे भारत

सिर्फ एक टैंकर ही नहीं, बल्कि वोर्टेक्सा लिमिटेड के डेटा के अनुसार कम से कम 7 टैंकर ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी यात्रा के बीच में ही रास्ता बदल दिया और चीन की बजाय भारत की ओर मुड़ गए. यह ट्रेंड साफ दिखाता है कि भारत ने मौके को भांपते हुए तेजी से अपनी रणनीति बदली है.

दरअसल, भारत के सभी बड़े रिफाइनर इस समय रूसी तेल की खरीद में जुटे हुए हैं. वजह साफ है, मिडिल ईस्ट से सप्लाई में अनिश्चितता बढ़ गई है और ऐसे में रूसी तेल एक बार फिर विकल्प बनकर उभरा है. इसी का नतीजा है कि भारत ने सिर्फ एक हफ्ते में करीब 30 मिलियन बैरल यानी 3 करोड़ बैरल रूसी तेल खरीद लिया है.

यह आंकड़ा अपने आप में बहुत बड़ा है और बताता है कि भारत किस स्तर पर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है. अमेरिका ने भी भारत को अस्थायी रूप से रूसी तेल आयात बढ़ाने की छूट दी है, जिससे भारत को और तेजी से खरीद करने का मौका मिला.

चीन पर भी पड़ रहा असर

इस पूरे घटनाक्रम का असर चीन पर भी पड़ रहा है. पिछले कुछ समय में रूस के लिए चीन एक बड़ा खरीदार बनकर उभरा था, खासकर तब जब भारत ने अपनी खरीद कम कर दी थी. लेकिन अब जैसे-जैसे भारत फिर से बाजार में सक्रिय हुआ है, रूस का तेल चीन से हटकर भारत की ओर शिफ्ट होने लगा है. इसके अलावा जापान और साउथ कोरिया जैसे देश भी अब फिर से रूसी तेल बाजार में लौटने लगे हैं. इससे आने वाले समय में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है.

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एक और उदाहरण “Zouzou N” नाम के टैंकर का है, जो कजाकिस्तान का सीपीसी ब्लेंड क्रूड लेकर चल रहा है. यह टैंकर भी पहले चीन के पास के समुद्री क्षेत्र की ओर जा रहा था, लेकिन मार्च की शुरुआत में उसने अपना रास्ता बदल लिया और अब भारत के सिका पोर्ट की ओर बढ़ रहा है.

कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान जंग ने वैश्विक तेल सप्लाई चेन को हिला दिया है, लेकिन भारत ने इस संकट को अवसर में बदलने की कोशिश की है. सस्ते रूसी तेल की आक्रामक खरीद से भारत न सिर्फ अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में अपनी रणनीतिक पकड़ भी मजबूत कर रहा है. आने वाले दिनों में अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है, तो भारत की यह रणनीति और भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

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