स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कराने के लिए ईरान वसूल रहा मोटी रकम, तेल टैंकर कंपनी ने चुकाए 20 लाख डॉलर – Oil company paid Iran two million dollar safe passage Strait of Hormuz nt rmxk


मिडिल ईस्ट में महाजंग के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद है. इससे भारत समेत दुनिया के कई मुल्क तेल संकट से जूझ रहे हैं. कई देश इस समुद्री इलाके से अपने तेल टैंकरों को सेफ पैसेज देने के लिए लगातार ईरान से बात कर रहे हैं. इस बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक तेल टैंकर कंपनी ने होर्मुज स्ट्रीट से सुरक्षित गुजरने के लिए ईरान को 20 लाख डॉलर का भुगतान किया.

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मिसाइल-ड्रोन हमलों के बीच ईरान कुछ चुनिंदा जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे रहा है. शिपिंग अधिकारियों का मानना है कि तेहरान इस अहम जलमार्ग पर अपना पूरा कंट्रोल साबित करना चाहता है.

समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस सप्ताह कम से कम आठ जहाजों ने ईरानी तट के पास लराक आइलैंड से असामान्य मार्ग अपनाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार किया. इनमें भारत, पाकिस्तान और ग्रीस के तेल टैंकर और बल्क कैरियर शामिल हैं. इनमें ईरान का अपना तेल टैंकर भी है. अधिकांश जहाज पहले ईरानी बंदरगाहों पर जा चुके थे.

महाजंग से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बुरा असर
फाइनेंशिल टाइम्स में छपी Lloyd’s List Intelligence की रिपोर्ट के मुताबिक, एक टैंकर ऑपरेटर ने सुरक्षित मार्ग के बदले ईरान को 20 लाख डॉलर का भुगतान किया. संभव है कि अन्य जहाजों ने भी इसी मार्ग का उपयोग किया हो, लेकिन उन्होंने अपने ऑटोमेटिक  ट्रैकिंग सिस्टम ऑन नहीं किए.

यह गतिविधियां ऐसे समय में हो रही हैं जब चीन और भारत सहित कई देश तेहरान के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने के लिए बातचीत कर रहे हैं. मिडिल ईस्ट में महायुद्ध शुरू होने से पहले इस जलमार्ग से दुनिया के लगभग 20% तेल का व्यापार होता था. अब यह लगभग बंद है.

क्या चाहता है ईरान?
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान उन देशों के जहाजों को प्राथमिकता दे रहा है, जिनका उसके साथ व्यापारिक संबंध रहा है. कूटनीतिक अलगाव को कम कर ईरान अमेरिका-इजराइल को अपनी ताकत दिखाना चाहता है. साथ ही ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर ट्रंप प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है. ईरान के पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद मोखबर ने भी कहा है कि युद्ध खत्म होने के बाद ईरान इस जलमार्ग के लिए नई व्यवस्था लागू करेगा.

इधर, अबू धाबी के उत्तर में चीन के 9 जहाज जमा हो रहे हैं, जो संभवतः स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करने की तैयारी में हैं. ये जहाज कॉस्को कंपनी से जुड़े हैं. वैसे भी ईरान और चीन के बीच लंबे समय से करीबी संबंध रहा है. बीजिंग अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी तेल खरीदता रहा है.

मिडिल ईस्ट जंग की वजह से इस समुद्री मार्ग में जहाजों का गुजरना लगभग बंद सा हो गया है. इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या 96% तक घट गई है. ईरान के गैस फील्ड पर इजरायली हमले और ईरान सरकार के काउंटर अटैक के बाद  यूरोप में गैस की कीमतों में 30% तक की वृद्धि हुई. तेल की कीमतें लगभग 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं.

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