Chaitra Navratri 2026: आज चैत्र नवरात्र का तीसरा दिन है, जो मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है. मां चंद्रघंटा देवी दुर्गा का तीसरा स्वरूप मानी जाती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में स्थित होता है, जिससे आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होती है. मां चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र घंटी के आकार का होता है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. इनका स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और स्वर्ण के समान चमकदार माना जाता है. मां के दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र होते हैं और इनका वाहन सिंह है, जो शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है. माना जाता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भय, दुख, रोग और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं. भक्तों को साहस और निर्भयता प्राप्त होती है तथा जीवन की बाधाएं समाप्त होती हैं.

मां चंद्रघंटा की इस योग में करें उपासना

चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन रवि योग का संयोग बन रहा है. रवि योग रात 12 बजकर 37 मिनट से लेकर 22 मार्च की सुबह 6 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. इस बीच आप माता चंद्रघंटा की पूजा-उपासना कर सकते हैं.

मां चंद्रघंटा की पूजन विधि

इस दिन सबसे पहले एक साफ स्थान पर पीला वस्त्र बिछाकर मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. पास में कलश स्थापित कर उस पर नारियल रखें. चंदन, रोली, हल्दी, फूल, दूर्वा आदि से मां का पूजन करें. मां को दूध से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाएं. अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें.

मां चंद्रघंटा के बीज मंत्र

इस दिन 'ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' या 'ओम चंद्रघंटायै नम:' मंत्र का जाप करें। इस मंत्र का जाप 108 बार करने से विशेष लाभ मिलता है।

करें ये विशेष उपाय

1. इस दिन मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाई और खीर अति प्रिय मानी जाती है. भोग लगाने के बाद इसे छोटी कन्याओं को बांटना शुभ माना जाता है. इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है.

2. पूजा के समय घंटी या शंख जरूर बजाएं. इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण शुद्ध होता है.

3. पूरे दिन गुस्सा, ईर्ष्या और नकारात्मक सोच से दूर रहें. मां चंद्रघंटा की पूजा में शुद्ध मन बहुत जरूरी होता है.

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