21 मार्च 1943 को हिटलर को एक कार्यक्रम के दौरान बर्लिन में बम से उड़ाने की साजिश रची गई थी. जर्मन सेना के ही पूर्व सैन्य अधिकारियों ने ये साजिश रची थी.  एक सप्ताह के भीतर हिटलर की हत्या की यह दूसरी कोशिश थी. हमलावर हिटलर को मारने से इसलिए चूक गए थे, क्योंकि वह तय समय से पहले कार्यक्रम स्थल से लौट गए थे.

21 मार्च 1943 को जब हिटलर हीरोज मेमोरियल डे पर बर्लिन के ज़ुगहॉस संग्रहालय आने वाले थे. वहां मौजूद आत्मघाती हमलावर ने बम विस्फोट के लिए 10 मिनट का टाइम सेट किया था, लेकिन, हिटलर का कार्यक्रम स्थल पर सिर्फ 8 मिनट के लिए रुके. यही वजह है कि यह साजिश सफल नहीं हो पाई.

जर्मन सेना के जनरल फेडोर वॉन बॉक के आर्मी ग्रुप सेंटर के सदस्य मेजर जनरल हेनिंग वॉन ट्रेस्कोव, एडॉल्फ हिटलर के खिलाफ रची गई कई साजिशों में से एक के नेता थे. अपने स्टाफ अधिकारी लेफ्टिनेंट फैबियन वॉन श्लाब्रेंडोर्फ और दो अन्य साजिशकर्ताओं के साथ, जो दोनों पुराने जर्मन परिवारों से थे और मानते थे कि हिटलर जर्मनी को अपमान की ओर ले जा रहा है, ट्रेस्कोव ने सोवियत संघ के बोरिसोव स्थित आर्मी ग्रुप के मुख्यालय में हिटलर के आने पर उसे गिरफ्तार करने की योजना बनाई थी. यह बात सन 1941 की गर्मियों की है.

तब  हिटलर अपने अंगरक्षकों से घिरा हुआ और कई गाड़ियों के काफिले में से एक में सवार होकर वहां पहुंचा और ट्रेस्कोव  उसके पास कभी पहुंच ही नहीं पाए. इसके बाद  ट्रेस्कोव ने 13 मार्च, 1943 को ऑपरेशन फ्लैश नामक एक साजिश के तहत फिर से प्रयास किया. इस बार, ट्रेस्कोव, श्लाब्रेनडॉर्फ और अन्य लोग सोवियत संघ के स्मोलेंस्क में तैनात थे.

यह भी पढ़ें: जब हिटलर ने जर्मन सेना में भर्ती शुरू की, तोड़ दी थी वर्साय की संधि

हिटलर सोवियत संघ के विन्नित्सा से जर्मनी के रास्टेनबर्ग वापस जाने की योजना बना रहा था. स्मोलेंस्क में एक पड़ाव पर रुकने की योजना थी. इस दौरान एक अनजान अधिकारी हिटलर की टीम एक पार्सल बम सौंपता. योजना अनुसार अधिकारी ने हिटलर को बम वाला पार्सल भी दे दिया. बताया गया कि यह रास्टेनबर्ग के दो वरिष्ठ अधिकारियों के लिए शराब का उपहार है.

सब कुछ योजना के अनुसार हुआ और हिटलर के विमान ने उड़ान भरी. बम भी उसी में था.  बम को मिन्स्क के ऊपर कहीं फटने के लिए उसमें टाइम सेट था. उस समय, बर्लिन में साजिशकर्ता “फ्लैश” कोड शब्द का उल्लेख होते ही केंद्रीय सरकार पर नियंत्रण करने के लिए तैयार थे. दुर्भाग्य से, बम फटा ही नहीं क्योंकि डेटोनेटर खराब था.

यह भी पढ़ें: जब हिटलर ने मुसोलिनी को लगाई फटकार, इटली के हाथ से निकल गया था लीबिया

इस घटना के एक सप्ताह बाद, 21 मार्च को 1943 को हीरोज मेमोरियल डे (प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए जर्मन सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने वाला अवकाश) पर ट्रेस्कोव ने कर्नल फ्रीहेर वॉन गेर्सडॉर्फ को बर्लिन के ज़ुगहॉस संग्रहालय में आत्मघाती हमलावर के रूप में कार्य करने के लिए चुना. वहां हिटलर कार्यक्रम में भाग लेने वाला था. गेर्सडॉर्फ ने अपने कोट की दोनों जेबों में बम रखे थे और उसे स्मारकों का निरीक्षण करते समय हिटलर के पास चुपके से जाकर बमों में विस्फोट करना था, जिससे तानाशाह – स्वयं और आसपास के सभी लोग मारे जाते. श्लाब्रेनडॉर्फ ने गेर्सडॉर्फ को बमों की आपूर्ति की  और प्रत्येक बम में 10 मिनट का फ्यूज लगा हुआ था.

प्रदर्शनी हॉल में पहुंचने पर, गेर्सडॉर्फ को सूचित किया गया कि फ्यूहरर को केवल आठ मिनट के लिए प्रदर्शनियों का निरीक्षण करना था – जो कि फ्यूज के पिघलने के लिए पर्याप्त समय नहीं था. इसलिए गेर्सडॉर्फ को रेस्टरूम में जाकर बम को निष्क्रिय करना पड़ा. इस तरह वो पकड़े जाने से बच गए और बम के साथ भाग निकले. हिटलर और उसके गेस्टापो पुलिस को इस साजिश का कभी पता नहीं चल पाया.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *