NFS Row: कांग्रेस और राहुल गांधी झूठ और फरेब के बन गए हैं ब्रांड एंबेसडर

ByCrank10

May 27, 2025



NFS Row: जातिगत जनगणना और आरक्षण को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी तकरार जारी है. मंगलवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कांग्रेस ने कभी पिछड़े वर्ग के कल्याण के लिए कोई काम नहीं किया. अब कांग्रेस पिछड़ों और दलितों की हितैषी बनने की कोशिश कर रही है. मौजूदा समय में कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी झूठ और फरेब के सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर बन गए हैं. गांधी परिवार ने आजादी के बाद से ही देश के दलित, पिछड़े और आदिवासियों को ठगने का काम किया है. लेकिन गांधी परिवार के शहजादे राहुल गांधी को दलित और पिछड़ा विरोधी इतिहास की जानकारी नहीं है. यही कारण है कि कांग्रेस हर रोज आयातित टूलकिट के सहारे झूठ फैलाने की कोशिश शुरू कर देती है.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी जिस “नॉट फाउंड सूटेबल”(उपयुक्त नहीं पाया जाना या अयोग्य करने) की बात कर रहे हैं, वह बाबासाहेब के नाम पर राजनीति करने वाली दलित, शोषित और वंचित विरोधी कांग्रेसी सोच की ही देन थी. आजादी के बाद कांग्रेस की नीति के कारण “नॉट फाउंड सूटेबल” का चलन था. इस चलन के कारण दलित, आदिवासी और पिछड़ों के अधिकारों का हनन किया गया. लेकिन इस वर्ग के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सामाजिक न्याय को समर्पित सरकार ने पहली बार द सेंट्रल एजुकेशन इंस्टीट्यूशन(रिजर्वेशन इन टीचर कैडर) कानून 2019 बनाया. इस कानून के कारण नॉट फाउंड सूटेबल इतिहास में दब गया. इस कानून के बाद दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित सीट को किसी दूसरे वर्ग से नहीं भरा जा सकता है. आरक्षण के काम में आ रही परेशानी को भी दूर करने का काम मोदी सरकार ने किया.

कांग्रेस ने कभी दलितों और पिछड़ों के हित में नहीं किया काम


प्रधान ने कहा आजादी के बाद लंबे समय तक केंद्र और राज्यों में कांग्रेस का शासन रहा. लंबे समय तक शासन करने के बाद भी देश में दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को समुचित अधिकार नहीं मिल सके. कांग्रेस ने हमेशा इस वर्ग के साथ छल करने का काम किया. वर्ष 2014 में केंद्र की सत्ता से यूपीए की विदाई के समय केंद्रीय विश्वविद्यालय में दलितों के 57 फीसदी, आदिवासियों के 63 फीसदी और पिछड़े वर्ग के 60 फीसदी शिक्षकों के पद रिक्त थे. उस समय कांग्रेस को इस वर्ग की याद नहीं आयी. केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार ने सत्ता संभालते ही इन रिक्त पदों को भरने का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया और आज इस वर्ग में रिक्त पदों की संख्या 25 फीसदी हो गयी है और इन पदों पर बहाली का काम सतत जारी है.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि यूपीए सरकार के वर्ष 2004-14 के कार्यकाल में आईआईटी में सिर्फ 83 दलित, 14 आदिवासी और 166 पिछड़े वर्ग के शिक्षक थे, वहीं अब दलित 398, 99 आदिवासी और 746 पिछड़े वर्ग के शिक्षक काम कर रहे हैं. मोदी सरकार ने सहायक प्रोफेसर के लिए पीएचडी की अनिवार्यता भी समाप्त की दी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को हर अच्छे काम में भी खराबी दिखने की आदत हो गयी है. हर बात पर संविधान की दुहाई देने वाली कांग्रेस ने बाबासाहेब के संविधान पर सबसे बड़ा हमला किया है. सामाजिक न्याय को जमीन पर उतारने का काम प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने किया है.

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