‘युद्ध रुका तो माइंस हटाने पर सोचेंगे…’, डोनाल्ड ट्रंप की मदद की अपील पर जापान का आया जवाब – japan hormuz minesweeping ceasefire iran war oil route security global energy crisis NTC agkp

ByCrank10

March 22, 2026 , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


जंग के दौरान समुद्र में कई जगह बारूदी सुरंगें बिछा दी जाती हैं. इन्हें नेवल माइंस कहते हैं. ये पानी के अंदर छुपी होती हैं और जहाज इनसे टकराए तो तबाह हो जाए. जंग खत्म होने के बाद इन माइंस को ढूंढकर हटाना पड़ता है. इसी काम को माइंसवीपिंग कहते हैं. यह बहुत खतरनाक और तकनीकी काम है जो सिर्फ कुछ देशों की नौसेनाएं कर सकती हैं. जापान उनमें से एक है.

जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने रविवार को एक टीवी कार्यक्रम में कहा, “अगर पूरी तरह सीजफायर हो जाए और होर्मुज में नेवल माइंस रास्ते में रुकावट बन रही हों तो माइंसवीपिंग पर विचार किया जा सकता है.” लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि यह अभी सिर्फ एक “काल्पनिक बात” है. जापान का अभी कोई तत्काल इरादा नहीं है.

जापान के लिए होर्मुज इतना जरूरी क्यों है?

जापान के पास खुद का तेल नहीं है. वो अपनी जरूरत का 90 फीसदी तेल बाहर से मंगाता है और उसका ज्यादातर हिस्सा होर्मुज के रास्ते आता है. यानी अगर होर्मुज बंद रहा तो जापान की पूरी अर्थव्यवस्था खतरे में पड़ सकती है. पेट्रोल, बिजली, कारखाने सब कुछ. इसीलिए जापान इस मामले में बहुत सतर्क है और हर कदम सोच-समझकर उठा रहा है.

जापान का संविधान आड़े आता है

यहां एक बड़ी पेचीदगी है. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जापान ने एक शांतिप्रिय संविधान बनाया जिसमें लिखा है कि जापान की फौज सिर्फ देश की रक्षा के लिए है, बाहर जाकर लड़ने के लिए नहीं.

लेकिन 2015 में एक कानून बना जिसने थोड़ी छूट दी. उसके मुताबिक, अगर जापान के किसी करीबी सुरक्षा साझेदार पर हमला हो और उससे जापान का अस्तित्व खतरे में पड़े तो जापान की सेना बाहर जा सकती है. माइंसवीपिंग इसी कानून के दायरे में आ सकती है. लेकिन सिर्फ तभी जब सीजफायर हो चुका हो.

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ट्रंप ने जापान पर दबाव बनाया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची से मुलाकात की. ट्रंप ने साफ कहा, “होर्मुज खोलने में मदद करो. आगे बढ़ो.” लेकिन जापानी PM ने ट्रंप को बता दिया कि जापान का कानून क्या करने की इजाजत देता है और क्या नहीं. यानी जापान ने अमेरिकी दबाव में आकर कोई जल्दबाजी करने से मना कर दिया.

ईरान-जापान के बीच बातचीत

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को जापान के विदेश मंत्री से बात की थी. ईरान ने संकेत दिया था कि जापान से जुड़े जहाजों को होर्मुज से गुजरने दिया जा सकता है. यानी एक तरफ ईरान जापान को रास्ता देने की बात कर रहा है. दूसरी तरफ जापान कह रहा है कि सीजफायर के बाद माइंस साफ करने आ सकते हैं. दोनों देश एक-दूसरे के काम आ सकते हैं. इसीलिए दोनों के बीच बातचीत जारी है.

दुनिया के बाकी देशों पर असर

होर्मुज से दुनिया का 20 फीसदी तेल गुजरता है. जब से यह रास्ता बंद हुआ है. तेल के दाम बढ़ गए हैं. जापान समेत कई देशों ने अपने तेल के सुरक्षित भंडार खोलने शुरू कर दिए हैं ताकि फिलहाल काम चलता रहे. लेकिन यह भंडार हमेशा के लिए नहीं चलेंगे. इसीलिए जापान जैसे देशों के लिए होर्मुज का खुलना बेहद जरूरी है.

असली खेल क्या है?

जापान बहुत चालाकी से चल रहा है. एक तरफ वो अमेरिका का पुराना दोस्त है. ट्रंप का दबाव है कि साथ दो. दूसरी तरफ ईरान से रिश्ते बिगाड़ना जापान को मंजूर नहीं. क्योंकि उसका 90 फीसदी तेल उसी रास्ते से आता है. तो जापान ने एक बीच का रास्ता निकाला – ईरान से बात करो, जहाजों को रास्ता दिलाओ. अमेरिका को बताओ कि कानून की सीमा में ही मदद होगी और सीजफायर के बाद माइंस साफ करने का काम करो – जो न जंग है, न पक्षपात.

इनपुट: रॉयटर्स

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