संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में सोमवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पेश होना था. तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसका कड़ा विरोध किया. TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने इसका विरोध करते हुए कहा कि संसदीय प्रक्रिया के तहत किसी भी बिल को पेश करने से 48 घंटे पहले उसे सदस्यों को सर्कुलेट किया जाना चाहिए, जो इस मामले में नहीं किया गया.

डेरेक ओ ब्रायन ने संसदीय कार्य मंत्री से प्रक्रिया का पालन करने का अनुरोध करते हुए कहा कि कार्यसूची में CAPF बिल पेश करने का जिक्र है, लेकिन सदस्यों को यह 48 घंटे पहले नहीं मिला. मेरा अनुरोध है कि संसद की प्रक्रिया का पालन किया जाए.

टीएमसी के सांसदों ने प्रक्रिया का पालन नहीं होने का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया. इसके बाद सरकार ने विपक्ष के रुख को देखते हुए बिल पेश करने का फैसला फिलहाल रोक दिया. एक वरिष्ठ सरकारी मंत्री ने कहा कि कुछ मतभेद सामने आए हैं, जिन्हें सुलझाने का प्रयास किया जाएगा.

राज्यसभा में बोलते TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन.(Photo:PTI)

आम सहमति बनाने की कोशिश, अमित शाह की बैठकें

सदन की कार्यवाही के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्षी दलों के सांसदों के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू भी मौजूद थे. सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक CAPF बिल और महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष के साथ आम सहमति बनाने के उद्देश्य से बुलाई गई थी.

दूसरी ओर, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी विपक्षी सांसदों जैसे जयराम रमेश, जॉन ब्रिटास, सुप्रिया सुले और प्रमोद तिवारी के साथ रणनीति बनाने के लिए बैठक की. साथ ही, अमित शाह ने NDA के घटक दलों के फ्लोर लीडर्स के साथ भी चर्चा की.

1. क्या है CAPF बिल?

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक का मुख्य उद्देश्य BSF, CRPF, ITBP, CISF जैसे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में IG और उससे ऊपर के रैंक पर नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, पदोन्नति और सेवा नियमों को स्पष्ट करना है.

मुख्य बिंदु:

IG और उससे ऊपर के पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के नियम तय होंगे.

CAPF कैडर अधिकारियों और IPS के बीच पोस्ट शेयरिंग का नियम.

कितने पद IPS के लिए और कितने CAPF कैडर के लिए होंगे, यह तय करने का प्रावधान.

सेवा शर्तें, प्रमोशन, पोस्टिंग, कार्यकाल आदि को कानून के तहत लाना.

अभी ये नियम एग्जीक्यूटिव ऑर्डर या गाइडलाइन से चलते हैं, अब इन्हें कानूनी रूप दिया जाएगा.

2. क्यों लाया जा रहा है?

IPS और CAPF अधिकारियों के बीच वर्षों से चल रहे वर्चस्व के विवाद को खत्म करना.

IPS प्रतिनियुक्ति को लेकर बार-बार होने वाले कोर्ट केसों को रोकना.

सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में कहा था कि IG स्तर पर IPS डेपुटेशन कम किया जाए.

किसे फायदा?

पदोन्नति के अवसर बढ़ेंगे और करियर में आ रहा ठहराव खत्म होगा.

स्पष्ट नीति होने से मुकदमों में कमी आएगी और बलों का प्रबंधन आसान होगा.

बलों के भीतर मनोबल बढ़ेगा और कमांड स्ट्रक्चर में पारदर्शिता आएगी/

3. कौन विरोध कर रहा है और क्यों?

यह मुख्य रूप से IPS बनाम CAPF कैडर का विवाद है.

मुख्य रूप से IPS एसोसिएशन और कुछ सेवानिवृत्त IPS अधिकारी विरोध में शामिल हैं.

विरोध की वजह:
IPS एसोसिएशन का तर्क है कि बलों की कमान और प्रशासनिक नेतृत्व IPS के पास रहना चाहिए क्योंकि उनके पास व्यापक अनुभव होता है.

CAPF का तर्क है कि वे पूरी सर्विस बल को देते हैं, लेकिन टॉप पोस्ट पर बाहर से आए IPS बैठ जाते हैं, जिससे प्रमोशन में ठहराव आता है.

4. अभी क्यों लाया जा रहा है?

बलों के भीतर अधिकारियों की पदोन्नति में भारी देरी हो रही है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है.

अलग-अलग गाइडलाइन्स की जगह सभी बलों के लिए एक समान कानून की जरूरत है.

बढ़ती आंतरिक चुनौतियों को देखते हुए एक स्थिर और स्पष्ट कमांड स्ट्रक्चर का होना अनिवार्य है.

यह सरकार की ओर से चलाए जा रहे व्यापक CAPF रिफॉर्म्स का एक अहम हिस्सा है.

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