ईरान के उर्जा मंत्री अब्बास अलीबादी ने देश की एनर्जी सिस्टम को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि अगर किसी हमले में बिजली संयंत्रों को नुकसान भी पहुंचता है, तो ईरान अपनी घरेलू क्षमता के दम पर उन्हें बहुत तेजी से फिर से तैयार कर सकता है.

मंत्री के अनुसार, ईरान की इलेक्ट्रिसिटी सिस्टम पूरी तरह सेंट्रलाइज्ड नहीं है, बल्कि देशभर में 150 से ज्यादा पॉवर प्लांट फैले हुए हैं. इस डिसेंट्रलाइज्ड व्यवस्था की वजह से किसी एक जगह पर हमला होने से पूरे सिस्टम पर बड़ा असर नहीं पड़ता.

उन्होंने खाड़ी देशों की ऊर्जा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. मंत्री ने कहा कि कई खाड़ी देशों के बिजली संयंत्र अमेरिकी कंपनियों द्वारा बनाए गए हैं, और नुकसान की स्थिति में उनकी मरम्मत के लिए भी उन्हीं कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता है. इसे उन्होंने ‘बिजनेस साइकल’ बताया.

ईरान के उर्जा मंत्री ने यह भी बताया कि देश में बिजली संयंत्रों के लिए जरूरी लगभग सभी उपकरण, यहां तक कि अहम टरबाइन के हिस्से भी घरेलू स्तर पर ही बनाए जाते हैं. इससे ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता काफी मजबूत हुई है.

उन्होंने आम नागरिकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि किसी भी आपात स्थिति में देश को विदेशी मदद की जरूरत नहीं पड़ेगी और स्थानीय संसाधनों के जरिए बिजली आपूर्ति को जल्दी बहाल कर दिया जाएगा.

डोनाल्ड ट्रंप ने हमले रोकने का दिया था निर्देश
डोनाल्ड ट्रंप ने कल ईरान को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा था कि उन्होंने अमेरिकी रक्षा तंत्र को निर्देश दिया है कि फिलहाल पांच दिनों तक ईरान के पॉवर प्लांट और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई सैन्य कार्रवाई न की जाए. उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच मध्य-पूर्व में जारी तनाव को कम करने के लिए गंभीर स्तर पर बातचीत चल रही है और स्थिति सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है.

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान समझौते के लिए काफी इच्छुक है और यह डील पांच दिन के भीतर पूरी हो सकती है. हालांकि ईरान इन दावों से इनकार कर रहा है.

ट्रंप ने कहा कि बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ही एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों को अस्थायी रूप से रोका गया है. उनके अनुसार, यदि समझौता होता है तो यह न केवल ईरान बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए सकारात्मक साबित होगा.

ईरान की ओर से बातचीत से इनकार किए जाने पर ट्रंप ने कहा कि उन्हें वहां से स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है, जबकि उनके अनुसार हाल ही में बातचीत हुई है. उन्होंने यह भी माना कि एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर संभावित हमलों का असर बातचीत पर पड़ सकता है.

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