चला गया अनुपम… पर तीन जिंदगियों में धड़कता रहेगा उसका जीवन, हजारों लोगों ने दी अंतिम विदाई – shujalpur anupam nalme organ donation indore 67th green corridor humanity example lcln


कभी-कभी जिंदगी बहुत जल्दी हार मान लेती है… लेकिन कुछ लोग जाते-जाते भी जिंदगी बांट जाते हैं. मध्य प्रदेश के शुजालपुर निवासी 34 वर्षीय अनुपम नालमे अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका दिल, उनका जीवन, उनकी सांसें अब तीन अलग-अलग शरीरों में धड़केंगी.

उनका जाना एक परिवार के लिए असहनीय पीड़ा लेकर आया, लेकिन उसी पीड़ा से जन्मी एक ऐसी मिसाल, जो समाज को हमेशा प्रेरित करती रहेगी. मां अहिल्या की पावन नगरी इंदौर ने एक बार फिर मानवता का सबसे उज्ज्वल रूप देखा, जब शुजालपुर के अनुपम के परिवार ने अपने बेटे को खोने के गहरे दुख के बीच अंगदान का निर्णय लेकर कई जिंदगियों को नया जीवन देने का संकल्प लिया.

अनुपम नालमे पिता जगदीश नालमे एक सामान्य दिन जी रहे थे. वे अपने सिविल इंजीनियर ताऊजी अनिल नालमे और जुबीन नालमे के साथ अभियंता का कार्य करते थे और स्वभाव से मददगार अनुपम हमेशा दूसरों के लिए खड़े रहने वाले इंसान थे.

लेकिन 20 मार्च को आए एक गंभीर मस्तिष्क रक्तस्राव ने सब कुछ बदल दिया. उन्हें इंदौर के सीएचएल केयर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने हर संभव प्रयास किया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था.

तमाम जांचों के बाद शाम 5.13 बजे और फिर रात 11.50 बजे दो चरणों में मस्तिष्क मृत्यु प्रमाणन किया गया. यह वह क्षण था, जब उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी थीं, लेकिन यहीं से एक नई उम्मीद जन्म लेने वाली थी.

दर्द के बीच लिया सबसे बड़ा निर्णय
जिस समय एक परिवार अपने बेटे को खोने के गम में टूट जाता है, उस समय नालमे परिवार ने एक ऐसा निर्णय लिया, जो हर किसी के बस की बात नहीं.

मुस्कान समूह के सेवादारों की परामर्श प्रक्रिया के बाद परिवार ने अंगदान के लिए सहमति दी. पिता जगदीश नालमे, बुआ डॉ. वर्षा, भाई अनुराग और जुबीन नालमे सभी ने मिलकर यह ठाना कि अनुपम की जिंदगी यहीं खत्म नहीं होगी, वह दूसरों के जीवन में आगे बढ़ेगा. यह निर्णय केवल एक सहमति नहीं, बल्कि मानवता के प्रति उनका समर्पण था.

तीन जिंदगियों में धड़केगा अनुपम
अनुपम का लिवर सीएचएल केयर अस्पताल में भर्ती 44 वर्षीय महिला को नया जीवन देगा. एक किडनी 34 वर्षीय महिला को और दूसरी किडनी शैल्बी अस्पताल में भर्ती 39 वर्षीय पुरुष में ट्रांसप्लांट की जाएगी. इन अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए इंदौर में 67वां ग्रीन कॉर्रिडोर बनाया गया, एक ऐसा रास्ता, जहां हर संकेत थम जाता है, लेकिन जिंदगी दौड़ती है.

और भी देना चाहता था यह परिवार
दुख की इस घड़ी में भी शुजालपुर का नालमे परिवार यहीं नहीं रुका. उन्होंने हाथ, अग्न्याशय, अस्थि, हृदय वाल्व और छोटी आंत तक दान करने की इच्छा जताई. राष्ट्रीय स्तर पर चेतावनी जारी की गई, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक मदद पहुंच सके. हालांकि तकनीकी कारणों और तत्काल जरूरत न होने के कारण इन अंगों का उपयोग नहीं हो सका.

अनुपम गया नहीं… अमर हो गया
एक बेटे को खोने का दुख शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता…लेकिन उस दुख के बीच लिया गया यह निर्णय अनुपम को अमर बना गया.अब वह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है, एक ऐसी प्रेरणाए जो सिखाती है कि मृत्यु अंत नहीं होती, यदि आप किसी और को जीवन दे जाएं.

गार्ड ऑफ ऑनर से दी अंतिम विदाई
इंदौर में हुई अंग दान की प्रक्रिया के बाद अस्पताल में अनुपम को राजकीय सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. इसके उपरांत अनुपम के पार्थिव शरीर को शुजालपुर लाया गया, यहां पर भी गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी गई.

राजकीय सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अनुपम को अंतिम विदाई.

अंतिम संस्कार शुजालपुर स्थित शांतिवन में हुआ और हजारों नम आखों ने अनुपम को अंतिम विदाई दी. साथ ही नालमे परिवार के द्वारा लिए गए मानवता के मिसाल वाले इस निर्णय की हर वर्ग ने सरहाना की.

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